मध्य पूर्व की धरती एक बार फिर युद्ध की लपटों में जल रही है।
ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है। जंग के आठवें दिन, इजरायल ने वो हमला किया जिसे अब तक की सबसे घातक जवाबी कार्रवाई कहा जा रहा है। 60 घातक फाइटर जेट एक साथ ईरानी आसमान में गरजे और कुछ ही मिनटों में ईरान का मिसाइल सुरक्षा तंत्र तार-तार हो गया।
इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने बताया कि उन्होंने ईरान के रक्षात्मक अनुसंधान मुख्यालय SPND को भी निशाने पर लिया है, जिसे अमेरिका पहले ही परमाणु बम अनुसंधान से जुड़ा हुआ बता चुका है।
हवाई हमलों में ईरान के करमानशाह और तबरीज़ के पास मौजूद मिसाइल भंडार और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तबाह किया गया।
इजरायली सेना का कहना है कि इस हमले में 25 लड़ाकू विमान खास मिशन पर रवाना किए गए थे, जिन्होंने ईरान की रणनीतिक संपत्तियों पर निशाना साधा। इलाके में भारी विमानरोधी गोलाबारी भी देखी गई।
ईरानी मानवाधिकार निगरानी समूह के मुताबिक, 13 जून से शुरू हुई इस जंग में अब तक 657 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 263 आम नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा 2000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
जहां एक तरफ इजरायल अपनी सैन्य सफलता को रणनीतिक बढ़त बता रहा है, वहीं ईरान की ओर से फिलहाल कोई ठोस जवाब नहीं आया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान जल्द ही पलटवार कर सकता है और यह संघर्ष अब सीमा पार युद्ध का रूप ले सकता है।
युद्ध अब केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं है – अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी खलबली है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े खिलाड़ी इस आग को शांत करने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन फिलहाल हालात नियंत्रण से बाहर दिख रहे हैं।
इस भयंकर टकराव ने यह दिखा दिया है कि जब दो दुश्मन देशों की सैन्य ताकतें आमने-सामने आती हैं,तो केवल सीमाएं ही नहीं, इंसानियत भी चिथड़े-चिथड़े हो जाती है। क्या यह जंग थमेगी या अब और भड़क उठेगी — इस सवाल का जवाब शायद आने वाले कुछ घंटों में ही मिल जाएगा।

