अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि उसके पास सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए महज दो सप्ताह का समय है। साथ ही उन्होंने इजरायल और ईरान के बीच जारी हवाई संघर्ष को लेकर युद्धविराम पर सशर्त समर्थन जताया है।
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं एक तय समयसीमा दे रहा हूं — और अधिकतम दो सप्ताह का समय है। उसके बाद परिस्थितियां जो भी बनें, अमेरिका निर्णय लेने के लिए तैयार है।”
इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका युद्धविराम का समर्थन करेगा, तो उन्होंने जवाब दिया, “यह पूरी तरह इस पर निर्भर करेगा कि हालात कैसे सामने आते हैं।” उन्होंने यह भी साफ किया कि यूरोप इस टकराव में कोई खास भूमिका नहीं निभा पाएगा।
ट्रंप ने कहा, “ईरान यूरोप से बात नहीं करना चाहता, वे अमेरिका से सीधे बात करना चाहते हैं। यूरोप इस स्थिति में कोई खास मदद नहीं कर सकता।”
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा में अपने यूरोपीय समकक्षों के साथ बातचीत की, लेकिन वार्ता का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान में सेना भेजेगा, तो उन्होंने कहा, “मैं ग्राउंड फोर्स (जमीनी सेना) के बारे में बात नहीं करना चाहता क्योंकि वह आखिरी विकल्प होता है।”
गौरतलब है कि इजरायल और ईरान के बीच युद्ध 13 जून से शुरू हुआ, जब इजरायली वायुसेना ने ईरानी ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल की ओर सैकड़ों मिसाइलें दागीं, जिनमें बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक हथियार शामिल थे।
इजरायल का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है।
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक इस संघर्ष में ईरान में 639 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि ईरानी हमलों में इजरायल में 24 नागरिक मारे गए हैं।

