मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और ईरान दोनों देशों पर जमकर भड़ास निकाली है। ट्रंप ने खुद युद्धविराम की घोषणा की थी, लेकिन कुछ ही घंटों में दोनों देशों ने सीजफायर की धज्जियां उड़ा दीं, खासकर इजरायल की तरफ से की गई सैन्य कार्रवाई पर ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। मंगलवार को ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान न केवल नाराजगी जाहिर की, बल्कि एक अनौपचारिक टिप्पणी में गाली भी दे दी। उन्होंने कहा, “मैंने जो समझौता करवाया था, उसे चंद घंटों में तोड़ दिया गया। इन्हें खुद नहीं पता कि ये क्या कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि वो न तो ईरान से खुश हैं और न ही इजरायल से। इस बयान से यह साफ है कि ट्रंप अपनी शांति योजना को टूटते देखकर बेहद हताश हैं। इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए इजरायल को साफ हिदायत दी थी कि ईरान पर हमला न किया जाए। उन्होंने कहा था: “अगर हमला हुआ तो यह समझौते का बड़ा उल्लंघन होगा। अपने पायलट्स को वापस बुलाओ।” कुछ ही समय बाद ट्रंप ने आश्वासन देते हुए दूसरा पोस्ट किया:
“इजरायल हमला नहीं कर रहा। सभी विमान वापस लौट रहे हैं।” तीसरे पोस्ट में उन्होंने ईरान पर टिप्पणी करते हुए लिखा: “ईरान कभी अपनी परमाणु सुविधाओं का पुनर्निर्माण नहीं करेगा।” इजरायली अधिकारियों की मानें तो ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर आग्रह किया कि ईरान पर किसी तरह का सैन्य हमला न किया जाए। लेकिन नेतन्याहू ने जवाब दिया कि: “हम संघर्षविराम के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं कर सकते। हमें प्रतिक्रिया देनी ही होगी।” बाद में बातचीत के बाद यह तय किया गया कि हमले को सीमित किया जाएगा, और केवल एक लक्ष्य को निशाना बनाया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में बार-बार मध्य पूर्व में शांति बहाली की कोशिशें कीं। लेकिन ताजा घटनाक्रम से लगता है कि अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है। दोनों देशों की कार्रवाई ने अमेरिकी नेतृत्व की मध्यस्थता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और ट्रंप अब सार्वजनिक रूप से इसे अपनी प्रतिष्ठा की हार मान रहे हैं।

