सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई, 2025 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें एक दिवंगत व्यक्ति की पत्नी को उसकी जमीन का असली मालिक घोषित किया गया था। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मृतक के भतीजे की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने मई 1991 की वसीयत के आधार पर जमीन पर दावा किया था।
अदालत ने कहा कि वसीयत की वैधता की पड़ताल मामले के तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि पत्नी की स्थिति या बेदखली के कारणों की अलग से जांच होनी चाहिए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी द्वारा पति का अंतिम संस्कार न करना, दंपति के बीच खटास का सबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि हिंदू/सिख परंपरा में अंतिम संस्कार आमतौर पर सपिंड रिश्तेदार करते हैं। मामले में दोनों पक्षकारों (पत्नी और भतीजे) की मृत्यु हो चुकी है, और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की। कोर्ट ने अधीनस्थ अदालत के उस निष्कर्ष को त्रुटिपूर्ण करार दिया, जिसमें पत्नी के अंतिम संस्कार न करने को रिश्तों में खटास का आधार माना गया था।

