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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में आगे बढ़ता उत्तर प्रदेश, शिक्षा, सुरक्षा और कृषि में बन रहा तकनीकी मॉडल

लखनऊ – उत्तर प्रदेश अब केवल देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में देश का भविष्य गढ़ने वाला अग्रणी प्रदेश बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने तकनीक को शासन, शिक्षा, कृषि, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में समावेशित कर जनकल्याण के नए आयाम गढ़े हैं। ‘एआई प्रज्ञा’ से लेकर ‘यूपी एग्रीज’, आईबीएम और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सहयोग से शुरू हुई पहल से लेकर लखनऊ को एआई सिटी बनाने की तैयारी तक उत्तर प्रदेश एक ऐसी डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता, उत्पादकता और दक्षता को नया आयाम मिल रहा है। भारत सरकार विजन के विजन 2047 के साथ समन्वित राज्य की एआई नीति और कौशल विकास जैसे प्रयास यह दर्शाते हैं कि यूपी केवल तकनीकी उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार का केंद्र बन रहा है।

उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि शासन और विकास की रीढ़ बनती जा रही है। युवाओं से लेकर किसानों और सरकारी तंत्र से लेकर शिक्षा तक, एआई के विविध आयामों को नीति और योजना से जोड़ा जा रहा है। अगले कुछ वर्षों में यूपी न केवल एआई स्किल्ड पॉपुलेशन का निर्माण करेगा, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व की भूमिका में भी दिखाई देगा। प्रदेश सरकार विजन 2047 के अनुरूप एआई नीति के ड्राफ्ट पर काम कर रही है। साथ ही एआई बूटकैम्प के जरिए 30 विभागों के सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे सरकारी प्रक्रियाओं में एआई का प्रभावी उपयोग कर सकें। इसके अतिरिक्त डीबीटी प्रणाली को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए कुछ मामलों में एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और डेटा एनालिटिक्स को शामिल किया गया है।

मार्च 2024 में स्वीकृत IndiaAI मिशन के अंतर्गत लखनऊ में ₹10,732 करोड़ के निवेश से एक विशाल एआई इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसमें 10,000 जीपीयू, मल्टी-मॉडल लैंग्वेज मॉडल्स और एआई इनोवेशन सेंटर शामिल हैं। यह निवेश देश के किसी भी अन्य तकनीकी ढांचे की तुलना में 67% अधिक है। इसके अतिरिक्त लखनऊ में एआई ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के प्रस्ताव अनुमोदन प्रक्रिया में हैं, जबकि वाराणसी में एआई-सक्षम स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम कार्यान्वयन के चरण में है।

उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख योजना एआई प्रज्ञा के अंतर्गत माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, गूगल और गुवी जैसे टेक दिग्गजों के साथ साझेदारी में 10 लाख से अधिक युवाओं, शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, सरकारी कर्मियों और किसानों को AI, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा में प्रशिक्षित किया जा रहा है। हर माह 1.5 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है और प्रशिक्षण में इंडस्ट्री-रेडी सर्टिफिकेशन भी शामिल हैं।

प्रदेश के 17 नगर निगमों और गौतमबुद्धनगर में एआई-सक्षम सीसीटीवी, फेशियल रिकग्निशन, नंबर प्लेट ट्रैकिंग, और SOS अलर्ट सिस्टम जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं। इनका 112 हेल्पलाइन और पुलिस कंट्रोल रूम से सीधा एकीकरण है। 70 जेलों में ‘जार्विस’ एआई निगरानी प्रणाली सक्रिय है, जिससे कैदियों की गतिविधियों पर 24×7 नजर रखी जा रही है।

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