लखनऊ शहर का दृश्य सेट किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश विधानसभा भवन और समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यालय के बाहर का माहौल दिखाया गया है। सड़कों पर पोस्टर और बैनर लगे हैं। भीड़ का शोर और पत्रकारों की हलचल सुनाई देती है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही, सियासत का रंगमंच गर्म हो चुका है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच पोस्टर वार शुरू हो गया है। यह सिर्फ कागज और स्याही का खेल नहीं, बल्कि विचारधाराओं, रणनीतियों और जनता के मन को जीतने की जंग है।
पीडीए पाठशाला पर सपा कार्यकर्त्ता का कहना है की हमारी पीडीए पाठशाला जनता की आवाज है! हम शिक्षा, सम्मान और समानता की बात कर रहे हैं। योगी सरकार स्कूलों का विलय कर रही है, बच्चों का भविष्य खतरे में डाल रही है। लेकिन हमारी पीडीए पाठशाला हर बच्चे को शिक्षा और सम्मान देगी!
भाजपा नेता सुभाष यदुवंश का कहना है की समाजवादी पार्टी की तथाकथित पीडीए पाठशाला एक धोखा है! यह जनता को गुमराह करने का तरीका है। क्या यही सपा का एजेंडा है? बच्चों को A फॉर अखिलेश और D फॉर डिंपल पढ़ाना? हमारी सरकार शिक्षा में सुधार कर रही है, डिजिटल यूपी बना रही है, और सपा बच्चों के दिमाग में सियासत का जहर भर रही है। सपा की पीडीए पाठशाला जनता को भटकाने का एक और हथकंडा है। वे स्कूल मर्जर का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनके पास कोई ठोस नीति नहीं है। उनकी पूरी राजनीति सैफई परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। हमारी सरकार उत्तर प्रदेश को विकसित बनाने के लिए काम कर रही है। सपा सिर्फ नकारात्मकता फैला रही है।
लखनऊ के चौराहों पर दोनों दलों के पोस्टर आमने-सामने हैं। एक तरफ सपा का पोस्टर: PDA पाठशाला: शिक्षा, सम्मान, समानता। दूसरी तरफ बीजेपी का पोस्टर: सपा का काला सच: A फॉर अखिलेश, D फॉर डिंपल। राहगीर और स्थानीय लोग चर्चा कर रहे हैं।

