लखनऊ – 11 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, और यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश 2047 विजन डॉक्यूमेंट पेश करने की तैयारी में है, लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही सियासी माहौल गरमा चुका है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच पोस्टर वार ने इस सत्र को और भी हंगामेदार बना दिया है। आइए, इस सत्र के प्रमुख बिंदुओं और सियासी जंग के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।”
यह मानसून सत्र 11 अगस्त से 16 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अवकाश रहेगा। सत्र का सबसे खास आकर्षण होगा 13 और 14 अगस्त को होने वाली 27 घंटे की मैराथन बैठक, जो सुबह 11 बजे शुरू होकर अगले दिन दोपहर 2 बजे तक चलेगी। इस दौरान विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश 2047 विजन डॉक्यूमेंट पर चर्चा होगी, जिसमें सभी मंत्री अपने-अपने विभागों के लिए विकास की योजनाएं पेश करेंगे। यह दस्तावेज उत्तर प्रदेश के अगले दो दशकों की दिशा और दशा तय करने का लक्ष्य रखता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे सभी दलों के सुझावों के साथ तैयार करने का निर्देश दिया है, और इसके लिए जनता के विचार लेने हेतु क्यूआर कोड भी जारी किए जाएंगे।
“सत्र से पहले रविवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी दलों से सत्र के सुचारु संचालन के लिए सहयोग मांगा गया। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना, सहयोगी दलों के नेता ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद, साथ ही विपक्षी नेताओं में सपा के माता प्रसाद पांडे, कांग्रेस की आराधना मिश्रा ‘मोना’, और बसपा के उमाशंकर सिंह शामिल थे। सतीश महाना ने कहा कि सकारात्मक और तथ्यपरक चर्चा से जनता की समस्याओं का समाधान संभव है।
लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही लखनऊ की सड़कों पर सियासी पोस्टर वार ने माहौल को और गरमा दिया है। बीजेपी ने सपा की पीडीए पाठशाला पर निशाना साधते हुए पोस्टर लगवाए, जिनमें दावा किया गया कि सपा की पीडीए—पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक—पहल में A का मतलब अखिलेश यादव और D का मतलब डिंपल यादव है। बीजेपी एमएलसी सुभाष यदुवंश ने इन पोस्टरों में लिखवाया, ‘सपा के पीडीए पाठशाला का काला सच’ और ‘प्रदेश का कौन अभिभावक अपने बच्चों को यह पढ़ाना चाहता है’। बीजेपी ने अखिलेश यादव से इस पर माफी मांगने की मांग की है।
“समाजवादी पार्टी ने भी इस हमले का जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सपा ने बीजेपी के नारे बटेंगे तो कटेंगे के जवाब में जुड़ेंगे तो जीतेंगे का नारा दिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी के पोस्टर वार को ‘राजनीतिक नौटंकी’ करार दिया और कहा कि बीजेपी जनता के असल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।”
“यह सत्र सिर्फ विजन डॉक्यूमेंट तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्ष ने सत्र को हंगामेदार बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, और अन्य विपक्षी दल बाढ़, सरकारी स्कूलों के विलय, कानून-व्यवस्था, और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रहे हैं। सपा के नेता माता प्रसाद पांडे ने कहा कि चार दिन का सत्र बहुत कम है, और कई अहम मुद्दे छूट सकते हैं। इसके अलावा, विपक्ष 27 घंटे की मैराथन बैठक का विरोध भी कर सकता है, जिसे सपा ने ‘नौटंकी’ करार दिया है।
सपा प्रवक्ता अमीक़ जमाई ने कहा की हम बाढ़ से प्रभावित लोगों की समस्याएं, स्कूलों के विलय से शिक्षा पर पड़ रहे असर, और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाएंगे। 27 घंटे की बैठक सिर्फ दिखावा है। सत्र को और लंबा करना चाहिए ताकि जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सके।
“विपक्ष के तेवरों को देखते हुए सत्ता पक्ष ने भी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों और विधायकों को विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी के साथ सदन में आने के निर्देश दिए हैं। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और किसी भी सवाल से पीछे नहीं हटेगी।

