उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के आबू नगर (रेडइया इलाका) में नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर 11 अगस्त 2025 को बड़ा विवाद शुरू हुआ। हिंदू संगठनों का दावा है कि यह मकबरा नहीं, बल्कि भगवान शिव और श्रीकृष्ण का प्राचीन मंदिर है, जिसमें त्रिशूल और कमल जैसे प्रतीक मौजूद हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह 500 साल पुराना मकबरा है, जिसे अकबर के पोते ने बनवाया था, और इसमें अबू मोहम्मद और अबू समद की कब्रें हैं। यह विवाद स्थानीय स्तर से बढ़कर 12 अगस्त 2025 को यूपी विधानसभा तक पहुंच गया, जहां विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए।
बीजेपी जिला अध्यक्ष मुखलाल पाल और हिंदू संगठनों (जैसे हिंदू महासभा, बजरंग दल) ने प्रशासन को ज्ञापन देकर 11 अगस्त को मकबरे में पूजा करने की अनुमति मांगी थी। उनका दावा था कि यह स्थल ठाकुरद्वारा मंदिर है। प्रशासन ने मकबरे को बांस-बल्ली से घेर दिया, लेकिन सुबह करीब 11 बजे सैकड़ों लोग बैरिकेड तोड़कर अंदर घुस गए। उन्होंने मकबरे में तोड़फोड़ की, भगवा झंडा फहराया, और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
तोड़फोड़ से नाराज मुस्लिम पक्ष ने पथराव शुरू किया, जिससे तनाव बढ़ गया। दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक और झड़प हुई। करीब पांच घंटे तक माहौल तनावपूर्ण रहा। पुलिस और पीएसी ने लाठीचार्ज और मशक्कत के बाद भीड़ को तितर-बितर किया। रातभर में क्षतिग्रस्त मकबरे और दरवाजे की मरम्मत कर दी गई। मकबरे के चारों ओर तीन स्तर की बैरिकेडिंग की गई, और ड्रोन व सीसीटीवी से निगरानी शुरू हुई।
पुलिस ने 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 190, 191(2), 191(3), 196, 301, संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, और 7 CLA एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। नामजद आरोपियों में बीजेपी जिला महामंत्री पुष्पराज पटेल, बीजेपी युवा मोर्चा जिला महामंत्री प्रसून तिवारी, बजरंग दल जिला सह-संयोजक धर्मेंद्र सिंह, सभासद विनय तिवारी, और अन्य शामिल हैं। कुछ सपा नेताओं के नाम भी एफआईआर में हैं

