बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में फिर से अहम जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय संयोजक की पदवी से नवाजा है। यह पद बसपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी मायावती के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इसके साथ ही आकाश आनंद पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे।
आकाश आनंद पहले राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर थे। मार्च 2025 में वे पार्टी से निष्कासित कर दिए गए थे, लेकिन अप्रैल में उनकी सार्वजनिक माफी और पार्टी के प्रति समर्पण के बाद मायावती ने उन्हें फिर से पार्टी में शामिल किया। अब उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है, जिससे उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।
इस पद के साथ, आकाश आनंद पार्टी की रणनीति बनाने, टिकट वितरण, चुनाव प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी का काम करेंगे। वे देशभर के सारे सेक्टर प्रमुखों, केंद्रीय और राज्य समन्वयकों, और प्रदेश अध्यक्षों के कार्यों की समीक्षा करेंगे ताकि पार्टी संगठन मजबूत किया जा सके।
पार्टी में हुए इस फेरबदल की एक खास बात यह है कि राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटरों की संख्या चार से बढ़ाकर छह कर दी गई है। इन नए राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटरों में रामजी गौतम, राजाराम, रणधीर सिंह बेनीवाल, लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव और धर्मवीर सिंह अशोक शामिल हैं, जो सभी सीधे आकाश आनंद को रिपोर्ट करेंगे।
यह सैन्य रूप से राजनीतिक रणनीति मायावती की 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सजगता का संकेत है। पार्टी संगठन को मजबूत कर चुनावी तैयारी को पुख्ता किया जा रहा है। आकाश आनंद की वापसी बसपा के अंदर राजनीतिक स्थिरता और सशक्त नेतृत्व की दिशा में अहम कदम के तौर पर देखी जा रही है।
आकाश आनंद, जो लंदन से MBA की डिग्री धारक हैं, पहले भी पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मायावती ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया था। निलंबन के बाद उनकी वापसी इस बात को दर्शाती है कि वे पार्टी की भविष्य की राजनीति में मोलभाव रखने वाले नेता हैं।
मायावती ने बीएसपी के संगठनात्मक ढांचे में भी कई बदलाव किए हैं, जिनमें प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्तियां और पार्टी के भीतर टीम का विस्तार शामिल है। इससे पार्टी के चुनावी अभियान को मजबूती मिलेगी और मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क तैयार होगा।
बसपा के आकाश आनंद की नई नियुक्ति और पार्टी की रणनीति आगामी चुनावों में उनकी वापसी और सत्ता की दिशा की नई मिशाल बनेगी। यह राजनीतिक बदलाव बसपा के लिए नई उम्मीदों और संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है।

