रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन की दो दिवसीय राजकीय यात्रा से लौटते ही एक बार फिर अपने सख़्त रुख में नज़र आए। राजधानी मॉस्को में लौटकर उन्होंने वैश्विक मंच से कहा कि “कुछ विवाद केवल हथियारों की ताक़त से ही तय होंगे।”
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह तीखा बयान पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और नाटो गठबंधन के लिए है, जिन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध में लगातार हथियार और वित्तीय मदद देने का आरोप मॉस्को लगाता आया है।
पुतिन की बीजिंग यात्रा में चीन ने रूस को आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का भरोसा दिया। ऊर्जा, रक्षा और व्यापार क्षेत्र में कई समझौते हुए। विश्लेषक मानते हैं कि चीन और रूस की नज़दीकियां पश्चिमी देशों के लिए नई भू-राजनीतिक चुनौती बन रही हैं।
“शांति की पेशकश हमने कई बार की, लेकिन अगर जवाब गोलियों से दिया जाएगा तो फ़ैसला भी हथियारों से ही होगा।” — पुतिन
उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पूर्वी यूरोप में तनाव फिर से बढ़ रहा है और यूक्रेन में सैन्य गतिविधियां तेज़ हो गई हैं।
विशेषज्ञों की राय:
“यह बयान रूस की सैन्य रणनीति का इशारा है।”
“पुतिन ने चीन से समर्थन पाकर एक तरह से पश्चिम को संदेश दिया है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं।”

