नई दिल्ली – हाल के विश्लेषणों के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ का अल्पकालिक असर तो होगा, लेकिन दीर्घकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा। टेक्सटाइल, आभूषण, झींगा, चमड़ा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे लगभग 48-60 अरब डॉलर के निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। इससे कुछ नौकरियां और व्यापारिक मुनाफा प्रभावित हो सकता है। हालांकि, भारत का मजबूत घरेलू बाजार, जीएसटी सुधारों से बढ़ी स्थानीय मांग और वैकल्पिक बाजारों (जैसे BRICS देशों) की ओर रुख करने की रणनीति इस असर को कम कर सकती है।
वाणिज्य मंत्रालय और विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की आर्थिक नीतियां, जैसे उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा, अर्थव्यवस्था को स्थिर रखेंगी। S&P ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत हैं, और 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियां और रुपये की स्थिरता भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही हैं।
इसके अलावा, भारत वैश्विक व्यापार में विविधता लाने और अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। टैरिफ युद्ध के बावजूद, भारत की प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था की प्रगति इसे विकास के रास्ते पर आगे ले जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक चुनौतियों के बावजूद, भारत की आर्थिक नीतियां और घरेलू मांग इसे वैश्विक मंदी के प्रभाव से बचा सकती हैं।

