दक्षिण एशिया की राजनीति और कूटनीति के लिहाज से एक बड़े घटनाक्रम में भारत और पाकिस्तान की सेनाएं लंबे अंतराल के बाद पहली बार आमने-सामने आती दिखाई देंगी। रूस अगले महीने व्लादिवोस्तोक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तहत एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास की मेज़बानी करेगा। इस अभ्यास में सदस्य देशों की सेनाएं एक साथ मिलकर आतंकवाद-रोधी और मानवीय बचाव अभियानों का अभ्यास करेंगी।
SCO के इस युद्धाभ्यास में चीन, रूस, कजाखस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों की सेनाएं भी हिस्सा लेंगी। इस अभ्यास की सबसे अहम बात यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान की सेनाएं किसी साझा मंच पर नज़र आएंगी।
ऑपरेशन सिंदूर ने दक्षिण एशियाई सुरक्षा परिदृश्य में एक नया मोड़ ला दिया था। इस अभियान के दौरान सीमा पार से बढ़ती गतिविधियों और आतंकवाद से निपटने की दिशा में सैन्य कार्रवाइयों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा किया था। नतीजा यह हुआ कि पिछले कुछ वर्षों से भारत और पाकिस्तान के बीच उच्च-स्तरीय सैन्य सहभागिता लगभग ठप पड़ी थी। ऐसे में दोनों सेनाओं का इस अभ्यास में हिस्सा लेना एक प्रतीकात्मक रूप से बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अभ्यास का मुख्य मकसद आतंकवाद-रोधी रणनीतियों का साझा आदान-प्रदान, शहरी इलाकों में फंसे नागरिकों का सुरक्षित निकासी अभ्यास, और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करना है।
सेनाएं आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाए गए नागरिकों को मुक्त कराने का अभ्यास करेंगी।
मानवीय संकट या प्राकृतिक आपदा आने पर संयुक्त बचाव और राहत कार्यों की रुपरेखा भी तैयार की जाएगी।
बहुराष्ट्रीय टुकड़ियां एक-दूसरे की सैन्य रणनीतियों और तकनीकी क्षमताओं से परिचित होंगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि SCO जैसे बहुपक्षीय मंच भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए संवाद का एक वैकल्पिक माध्यम बनते जा रहे हैं। भले ही द्विपक्षीय स्तर पर वार्ता लंबे समय से रुकी हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों की सेनाओं की उपस्थिति क्षेत्रीय शांति और विश्वास बहाली की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

