नेपाल एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में सोमवार से जारी जनप्रदर्शन ने सरकार की नींव हिला दी है। हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और तत्काल राजनीतिक व आर्थिक सुधार की मांग कर रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि विश्लेषक इसे बांग्लादेश में हाल ही में हुए राजनीतिक उथल-पुथल से जोड़कर देख रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की 5 बड़ी मांगें इस प्रकार हैं:
भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कदम और स्वतंत्र जांच आयोग का गठन
युवाओं के लिए रोजगार की गारंटी और नई नीति
महंगाई पर नियंत्रण और आवश्यक वस्तुओं पर सब्सिडी
राजनीतिक पारदर्शिता और नेताओं की विशेष सुविधाओं पर रोक
संविधान संशोधन द्वारा स्थानीय निकायों को ज्यादा अधिकार
संसद में भी विपक्ष ने इस आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता का धैर्य अब खत्म हो रहा है और अगर सरकार ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए तो स्थिति हाथ से निकल सकती है।
प्रधानमंत्री ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की मौजूदा स्थिति एक चेतावनी संकेत है। यदि सरकार ने समय रहते जनता की मांगों को संबोधित नहीं किया, तो यह विरोध बांग्लादेश जैसे बड़े राजनीतिक भूचाल में बदल सकता है।

