दोहा। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कतर के दोहा में की गई अपनी मिलिट्री स्ट्राइक को लेकर एक बेहद विवादित बयान दिया है। नेतन्याहू ने इस कार्रवाई को अमेरिका के 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद की गई कार्रवाई के समान बताया है। उनका यह बयान वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
नेतन्याहू ने कहा, “9/11 के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जो कार्रवाई की, वही हमने भी की। हम आतंकवादियों को कहीं भी छुपने नहीं देंगे। यही वजह है कि हमने दोहा में हماس के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जो भी देश आतंकवाद को समर्थन देता है, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। नेतन्याहू ने कतर को चेतावनी दी कि अगर उसने हामास के नेताओं को नहीं निकाला या उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो इजराइल “स्वयं कार्रवाई करेगा।”
दोहा में हुई इस स्ट्राइक के दौरान हामास के कई नेता निशाना बनाए गए, जिनमें प्रमुख वार्ता कर्ता खलील अल-हया भी शामिल थे। इस हमले को इस क्षेत्र के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि कतर हामास के राजनीतिक विभाग का मुख्यालय माना जाता है और वह गाजा संघर्ष में मध्यस्थता कर रहा है।
इस हमले के बाद कतर सरकार ने इसे “राज्य आतंकवाद” करार देते हुए कड़ी निंदा की है और कहा है कि इससे गाजा के बंदियों की रिहाई की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। कतर के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमला क्षेत्र में शांति और स्थिरता की कोशिशों को विफल करने की कोशिश है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की व्यापक आलोचना हो रही है, जहां कई देशों ने इजराइल की इस कार्रवाई को कतर की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेस ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और सभी पक्षों से शांति की अपील की है।
इजराइली रक्षा मंत्री इस्राएल काट्ज ने भी कहा कि इजराइल “अपने दुश्मनों को कहीं भी निशाना बनाने के लिए तैयार है”। वहीं, इस हमले ने इस्राइल-फिलिस्तीन संघर्ष को और जटिल बना दिया है और क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।
अब आगामी अरब-इस्लामी शिखर सम्मेलन में इस हमले और इसके बाद की परिस्थितियों पर चर्चा होगी, जिससे मध्यपूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

