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नेपाल में हड़कंप: आंदोलन के बाद 12,500 कैदी जेल से फरार, पुलिस कर रही सरगर्मी से तलाश, सुरक्षा संकट गहराया l

नेपाल में बीते हफ्तों से जारी युवाओं के आंदोलन ने देश की राजनीति और कानून-व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। आंदोलन के बीच हुई हिंसक झड़पों और अव्यवस्था का फायदा उठाते हुए हजारों कैदी जेल से भाग निकले। रिपोर्ट्स के अनुसार, देशभर की अलग-अलग जेलों से करीब 12,500 कैदी फरार हो गए हैं। अब नेपाल पुलिस इन फरार कैदियों की तलाश में सरगर्मी से जुटी हुई है।

युवाओं के आंदोलन के दौरान राजधानी काठमांडू और कई अन्य जिलों में पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार भिड़ंत हुई। इसी दौरान कई जेलों में सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई। प्रदर्शनकारियों ने जेलों पर हमला करके तोड़फोड़ की, जिसके चलते कैदियों को भागने का मौका मिल गया। कई जगह कैदियों ने स्वयं जेल प्रशासन पर हमला बोलकर ताले तोड़ दिए और सामूहिक रूप से फरार हो गए।

फरार कैदियों की तादाद इतनी ज्यादा है कि नेपाल पुलिस और सुरक्षा बलों पर भारी दबाव आ गया है।

पुलिस ने कैदियों की लिस्ट और तस्वीरें सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है।

नेपाल-भारत सीमा और नेपाल-चीन सीमा पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।

एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

नेपाल के हालात का असर अब भारतीय सीमा इलाकों में भी महसूस किया जा रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कई फरार कैदी छुपने के लिए भारतीय सीमा में घुस सकते हैं। इसी कारण से एसएसबी और स्थानीय पुलिस सतर्क हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह संकट नेपाल की सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है। पहले से ही आर्थिक और सामाजिक दबाव झेल रहे नेपाल में अब आंतरिक सुरक्षा डांवाडोल हो चुकी है। कैदियों के फरार होने से अपराध दर बढ़ने का भी डर जताया जा रहा है।

नेपाल पुलिस ने इन कैदियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

हर जिले में अलग-अलग टास्क फोर्स बनाई गई है।

स्थानीय लोगों से अपील की जा रही है कि अगर किसी संदिग्ध की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

इंटरपोल की मदद लेने पर भी विचार हो रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर निगरानी और कड़ी हो सके।

नेपाल के आम नागरिकों में इस घटना के बाद भय का माहौल है। गांव-शहरों में लोग रात को घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों ने भी सरकार से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ युवाओं का आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता, दूसरी तरफ जेल से भाग निकले हजारों कैदियों को पकड़ने की जिम्मेदारी। अगर जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो नेपाल गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर सकता है।

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