पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बनती है तो सऊदी अरब खुलकर पाकिस्तान का समर्थन करेगा। आसिफ का यह दावा इस आधार पर किया गया है कि रियाद और इस्लामाबाद के बीच रणनीतिक पारस्परिक रक्षा सहयोग का समझौता मौजूद है।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते सिर्फ आर्थिक या धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी गहरे और मजबूत हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच वर्षों से सैन्य प्रशिक्षण, हथियारों की आपूर्ति और सुरक्षा मामलों में सहयोग होता आया है। उनके मुताबिक यही सहयोग युद्ध की स्थिति में स्पष्ट समर्थन के रूप में दिखाई देगा।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आसिफ का यह बयान पाकिस्तान की घरेलू राजनीति और सुरक्षा चुनौतियों के बीच दिया गया है। पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को कूटनीतिक दबाव में लाने की कोशिश करता रहा है और इस बयान को इसी रणनीति की कड़ी माना जा रहा है। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञ यह भी इंगित करते हैं कि सऊदी अरब अपने हितों और कूटनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए दक्षिण एशिया के मामलों में सीधे हस्तक्षेप से बचता रहा है। सऊदी अरब भारत के साथ भी व्यापक आर्थिक और ऊर्जा सहयोग करता है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच यदि तनाव या युद्ध की स्थिति उत्पन्न होती है, तो रियाद के लिए किसी एक पक्ष का स्पष्ट समर्थन करना आसान नहीं होगा।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान ऐसे समय पर आया है जब जम्मू-कश्मीर और नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास तनाव लगातार बढ़ रहा है। कुछ दिनों से पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट भी गहराया हुआ है, जिस वजह से सरकार घरेलू मोर्चे पर जनता और सेना का विश्वास बनाए रखने के लिए आक्रामक बयानबाजी कर रही है।
फिलहाल, पाकिस्तान का यह दावा कितना व्यावहारिक है और सऊदी अरब वास्तव में किस हद तक उसका समर्थन करेगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा। लेकिन ख्वाजा आसिफ का यह बयान न केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों में नई बहस को जन्म दे रहा है, बल्कि इससे खाड़ी देशों के सामरिक रुख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

