अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर अपने अनोखे अंदाज़ में सभी का ध्यान खींच लिया। जैसे ही वे बोलने के लिए मंच पर पहुंचे, उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के मज़ाकिया अंदाज़ में कहा— “मुझे बिना टेलीप्रॉम्प्टर के बोलने में कोई दिक्कत नहीं है, और इसे लेकर मैं बुरा भी नहीं मान रहा।”
उनकी यह बात सुनते ही सभा में मौजूद कई देशों के नेता ज़ोर से हंस पड़े और लंबे समय तक ठहाकों की गूंज सभागार में सुनाई देती रही। यह उनके भाषण की हल्की-फुल्की शुरुआत थी, जिसने वैश्विक स्तर की गंभीर बैठक का माहौल कुछ क्षणों के लिए सहज और रोचक बना दिया।
ट्रंप का यह भाषण लगभग 56 मिनट लंबा रहा। इसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर अपनी राय रखी, लेकिन बीच-बीच में उनकी हाज़िरजवाबी और चुटकुले भी आते रहे, जिनसे माहौल बार-बार हल्का हो गया।
उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति, आर्थिक सुधार, वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा संकट और वर्ल्ड ट्रेड जैसे बड़े विषयों को छुआ। लेकिन अपनी बात रखने का अंदाज़ इतना अलग था कि कई बार गंभीर संदेश देते हुए भी उन्होंने सबको हंसने पर मजबूर कर दिया।
दरअसल, ट्रंप अपने बिंदास अंदाज़ और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी जब उन्होंने कहा कि वे “टेलीप्रॉम्प्टर के बिना भी सहजता से बोल सकते हैं”, तो उनके आत्मविश्वास ने सबका ध्यान खींचा।
कई देशों के प्रतिनिधियों ने बाद में कहा कि ट्रंप का यह अंदाज़ भले ही असामान्य है, लेकिन इससे माहौल अधिक इंटरैक्टिव हो जाता है और श्रोताओं की रुचि बनी रहती है।
वैश्विक मुद्दों पर भी कड़ा रुख
भले ही भाषण की शुरुआत हास्यपूर्ण रही, लेकिन ट्रंप ने कई गंभीर बातें भी साफगोई से रखीं। उन्होंने कहा कि दुनिया को आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने वैश्विक व्यापार में सुधार और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर ज़ोर दिया।
उनकी आलोचना पश्चिम एशिया की नीतियों और चीन की आर्थिक रणनीतियों पर भी झलकी। हालांकि, उनकी कुछ टिप्पणियों को लेकर कुछ प्रतिनिधियों ने हल्का असहमति भी जताई।
वैश्विक मंच पर ट्रंप का अलग अंदाज़
ट्रंप का यह भाषण एक बार फिर दिखाता है कि वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में परंपरागत तरीकों से हटकर अपनी शैली में मंच पर छा जाते हैं। जहां एक ओर कुछ लोग उनकी गंभीर मुद्दों पर हल्केपन की आलोचना करते हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग मानते हैं कि यही अंदाज़ उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।

