नेपाल में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद अब अफ्रीका के मेडागास्कर में भी बिजली और पानी की कटौती को लेकर युवा वर्ग, खासकर Gen Z सड़कों पर उतर आया है। देशभर में गुरुवार से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में हजारों युवा नारेबाजी के साथ टायर जलाते और पोस्टर लिए सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने टी-शर्ट पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया, जिससे पूरे देश का प्रशासनिक तंत्र हिल गया.
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में अब तक लगभग 22 लोग मारे जा चुके हैं जबकि सौ से अधिक घायल हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने सुरक्षाबलों की जरूरत से ज्यादा कड़ी कार्रवाई को दोषी ठहराया है। राजधानी अंतानानारिवो और कई अन्य शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया, लेकिन प्रदर्शन लगातार बढ़ते गए। हिंसा में कई राजनेताओं के घरों पर भी हमले हुए और बाजारों में लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं.
वृद्धि करते विरोध और जनता की मांगों को देखते हुए मेडागास्कर के राष्ट्रपति आंद्रि राजोएलिना ने सोमवार को राष्ट्रीय टेलीविजन पर घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री क्रिश्चियन न्त्साय सहित पूरी सरकार को बर्खास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के कई सदस्य जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए, इसलिए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने आगामी नए सिरे से सरकार बनाने के लिए आवेदन मांगे और तीन दिन के भीतर नए प्रधानमंत्री के प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी.
राजोएलिना ने प्रदर्शनकारियों से संवाद की बात कही और उनकी मांगों को समझने की बात कही। हालांकि प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, राजोएलिना ने अपने इस्तीफे का कोई संकेत नहीं दिया है। राजोएलिना 2019 से राष्ट्रपति पद पर हैं तथा 2009 के तख्तापलट के बाद भी अस्थायी सरकार के नेता रह चुके हैं। उनका यह फैसला देश की राजनीतिक स्थिरता के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है.
मेडागास्कर, जो 3.1 करोड़ की आबादी वाला एक द्वीपीय एफ्रीकी देश है, लंबे समय से गरीबी, मंहगाई और सरकारी सेवाओं के निराशाजनक हालात से जूझ रहा है। युवा वर्ग में बढ़ती निराशा और आर्थिक तंगी इस आंदोलन की मुख्य वजह मानी जा रही है। Nepal जैसे अन्य देशों में भी इसी तरह की युवा-जेनरेशन की सक्रियता ने राजनीतिक हलचलों को जन्म दिया है, जो अब मेडागास्कर तक पहुंच गई है.
मेडागास्कर में बिजली-पानी की कटौती के खिलाफ युवा आंदोलन ने राजनीतिक संकट को बुरी तरह से जन्म दिया है, और राष्ट्रपति के इस बड़े फैसले के बाद देश की राजनीतिक दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना है। इस घटना ने दिखा दिया कि युवा शक्ति ने दुनिया के कई देशों में बदलाव की भूक तोड़ दी है।

