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चार सर्वे, एक नतीजा: बिहार में एनडीए की लहर, महागठबंधन को कड़ी चुनौती

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आए चार ताज़ा ओपिनियन पोल ने एनडीए की स्थिति मज़बूत बताई है। 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच जारी इन सर्वेक्षणों में एनडीए को 40% से 52% तक वोट शेयर और 130 से 158 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। ये अनुमान 2020 के नतीजों से बेहतर हैं और इस बार एनडीए 2010 जैसी ऐतिहासिक जीत दोहराने की स्थिति में दिख रहा है।
चार अलग-अलग सर्वे, एक ही संदेश
मैट्रिक्स, जेवीसी ओपिनियन पोल, स्पीक मीडिया नेटवर्क और वोट वाइब – इन चारों एजेंसियों के सर्वे ने लगभग एक जैसी तस्वीर दिखाई। सभी में एनडीए को जदयू, बीजेपी, लोजपा (राम विलास) और हम (सेक्युलर) के साथ मिलकर मजबूत बढ़त मिलती दिख रही है।
नीतीश कुमार को जनता का भरोसा
मैट्रिक्स के सर्वे में 76% लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामकाज पर संतोष जताया। इनमें से 40% ने “बहुत संतुष्ट” और 36% ने “संतुष्ट” कहा। जब पूछा गया कि बिहार में कौन सी पार्टी अच्छा शासन दे सकती है, तो 35% लोगों ने बीजेपी और 18% ने जदयू का नाम लिया। इससे एनडीए को कुल 43% समर्थन मिलता दिख रहा है।
सबसे बड़ा संकेत यह है कि 20 साल से मुख्यमंत्री रहने के बावजूद 42% लोग अब भी नीतीश कुमार को सीएम के रूप में देखना चाहते हैं।
वोट शेयर 52% तक पहुंचने का अनुमान
एक सवाल में जब लोगों से पूछा गया कि अगर आज ही चुनाव हों तो किस गठबंधन को जीतना चाहिए, तो 52% ने एनडीए को चुना। इसका मतलब है कि एनडीए को 52% तक वोट शेयर मिलने की संभावना है। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2010 में एनडीए ने 39% वोट शेयर के साथ 243 में से 206 सीटें जीती थीं।
महागठबंधन भी दे रहा चुनौती
हालांकि सर्वेक्षणों में एनडीए को स्पष्ट बढ़त दिखाई गई है, लेकिन महागठबंधन भी मजबूती से चुनाव मैदान में है और कड़ी टक्कर देने की कोशिश कर रहा है। असली तस्वीर नवंबर 2025 में नतीजे आने पर ही साफ होगी कि बिहार की जनता किसे चुनती है।

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