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ओबीसी आरक्षण पर राहुल गांधी का बड़ा दांव, कांग्रेस नेता बोले – “न्यायपालिका न रोके रास्ता

देश में आरक्षण को लेकर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है। खासतौर पर तेलंगाना में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को मिलने वाले 42% आरक्षण पर चर्चा ज़ोरों पर है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता वी. हनुमंता राव ने बड़ा बयान दिया है और राहुल गांधी की सोच का समर्थन किया है।

हनुमंता राव का कहना है कि राहुल गांधी 50% आरक्षण की तय सीमा को हटाने की वकालत कर रहे हैं ताकि ओबीसी समाज को न्याय मिल सके। उन्होंने सीधे तौर पर अदालत से अपील की कि वह इस रास्ते में रुकावट न बने। राव ने कहा,

“जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण दिया गया, तब किसी ने विरोध नहीं किया। तो अब ओबीसी के साथ भेदभाव क्यों?”

तेलंगाना में 42% आरक्षण की मांग को लेकर बढ़ा दबाव
तेलंगाना के स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण की मांग की जा रही है। हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर है, जिससे कानूनी अड़चनें खड़ी हो गई हैं।

इसी मुद्दे को लेकर हैदराबाद में रविवार को एक अहम गोलमेज बैठक हुई, जिसमें कई राजनीतिक दिग्गज और सामाजिक संगठनों के नेता शामिल हुए। बैठक में पूर्व राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मंत्री वक्ति श्रीहरि, श्रीनिवास गौड़, गंगुला कमलाकर, पुट्टा मधु और आनंद भास्कर जैसे बड़े नाम मौजूद थे।

राज्यसभा सांसद आर. कृष्णैया की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में फैसला लिया गया कि ओबीसी आरक्षण को सुरक्षित रखने के लिए देश के टॉप वकीलों को केस लड़ने के लिए नियुक्त किया जाएगा।

“हमारी एकता ही हमारी ताकत”
बैठक में सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि 42% आरक्षण न केवल कानूनी रूप से सही है, बल्कि सामाजिक न्याय की दृष्टि से भी पूरी तरह उचित है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर अदालत या कोई भी राजनीतिक ताकत इस व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश करेगी, तो उसका ज़ोरदार विरोध किया जाएगा।

सभी समुदायों से एकजुट रहने की अपील भी की गई ताकि इस लड़ाई को मजबूती से लड़ा जा सके।

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