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अधिवक्ता से मारपीट के विरोध में वकीलों का हंगामा, टोल प्लाजा पर गिरफ्तारी के बाद खुला रास्ता

लखनऊ–सुलतानपुर हाईवे पर स्थित बारा टोल प्लाजा पर एक प्रयागराज हाईकोर्ट के अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट की घटना ने बाराबंकी सहित आसपास के जिलों में वकीलों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया। घटना के विरोध में अधिवक्ताओं ने टोल प्लाजा पर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते करीब 20 घंटे तक टोल वसूली पूरी तरह बंद रही और यातायात भी प्रभावित हुआ।

मिली जानकारी के अनुसार प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के परानूपुर गांव निवासी अधिवक्ता रत्नेश कुमार शुक्ला, जो प्रयागराज हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं, बुधवार को अपनी कार से लखनऊ जा रहे थे। आरोप है कि बारा टोल प्लाजा पर टोल कर्मियों से किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और उनकी सोने की अंगूठी भी छीन ली गई। इस घटना में अधिवक्ता को चोटें आईं, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

शुरुआत में पुलिस द्वारा गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में जब आरोपियों का केवल शांतिभंग की धाराओं में चालान किए जाने की जानकारी सामने आई, तो अधिवक्ता समुदाय में नाराजगी और बढ़ गई। गुरुवार को हैदरगढ़, लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुलतानपुर से बड़ी संख्या में वकील टोल प्लाजा पर एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस दौरान उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य अखिलेश अवस्थी भी हाईकोर्ट लखनऊ के तीन दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक (ASP), उप-जिलाधिकारी (SDM) और क्षेत्राधिकारी (CO) से सवाल किया कि मारपीट जैसे गंभीर मामले में केवल शांतिभंग की धाराएं क्यों लगाई गईं। अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर वकीलों का आक्रोश और तेज हो गया।

लगातार दबाव और प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टोल प्लाजा के मैनेजर जंगभान सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं को वीडियो फुटेज दिखाकर गिरफ्तारी की पुष्टि की। इसके बाद भी अधिवक्ताओं ने टोल प्लाजा संचालक कंपनी का लाइसेंस रद्द करने, स्थानीय अधिवक्ताओं को टोल फ्री सुविधा देने और मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

अधिवक्ताओं का कहना था कि शांतिभंग की धाराओं में चालान करना उनके साथ विश्वासघात है और इससे पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मारपीट के मामले में पांच आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया कि टोल प्लाजा के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय अधिवक्ताओं के लिए टोल फ्री व्यवस्था को लेकर टोल प्रबंधन से बातचीत कर गंभीरता से विचार किया जाएगा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन घटना ने टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली और पुलिस कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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