ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी की नई रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में भारत की स्थिति भ्रष्टाचार के मामले में पहले से बेहतर हुई है। रिपोर्ट में शामिल 180 देशों की सूची में भारत को 91वां स्थान मिला है, जबकि पिछले साल यह 92वें नंबर पर था। भारत का करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) स्कोर 39 दर्ज किया गया है, जो यह दिखाता है कि देश में बीते वर्षों की तुलना में भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ हद तक कमी आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की समस्या बढ़ती नजर आई है, वहीं भारत में 2024 की तुलना में 2025 में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि यह सुधार सीमित है, लेकिन पिछले तीन वर्षों में भारत की रैंकिंग में लगातार सुधार देखा गया है। साल 2023 में भारत 93वें स्थान पर था, जो अब बढ़कर 91 हो गया है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो डेनमार्क को दुनिया का सबसे कम भ्रष्टाचार वाला देश बताया गया है। वहीं दक्षिण सूडान और सोमालिया को सबसे ज्यादा भ्रष्ट देशों की श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केवल 7 देश ऐसे हैं जिनका स्कोर 80 से ऊपर है, जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार एक वैश्विक चुनौती बना हुआ है।
यूरोप की बात करें तो ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों के स्कोर में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रिटेन अब टॉप-20 देशों की सूची से बाहर हो चुका है। वहीं जर्मनी एकमात्र यूरोपीय देश है, जहां भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ कमी देखने को मिली है। अमेरिका के स्कोर में भी गिरावट आई है और उसका स्थान 28 से फिसलकर 29 हो गया है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करते रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन में तमाम प्रयासों के बावजूद भ्रष्टाचार के मामलों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। चीन का स्कोर अब भी 43 बना हुआ है और वह 76वें स्थान पर है।
हालांकि भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन 39 का स्कोर अब भी चिंताजनक माना जाता है। इसका मतलब है कि भारत अभी भी भ्रष्टाचार को पूरी तरह नियंत्रित करने के मामले में दुनिया के कई देशों से पीछे है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारत में यह सुधार किन ठोस कारणों से हुआ।
इस सर्वे को तैयार करने के लिए चार प्रमुख आधार तय किए गए हैं, जिनमें लोकतांत्रिक संस्थानों को मिलने वाला राजनीतिक चंदा, सरकारी संस्थाओं की स्थिति, सेवाओं तक पहुंच के लिए नकद भुगतान, और पत्रकारों को राज्य द्वारा निशाना बनाया जाना शामिल है।
रिपोर्ट जारी करते हुए ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी ने कहा कि प्रमुख वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की अनदेखी के कारण दुनिया की व्यवस्था दबाव में है। सशस्त्र संघर्ष, जलवायु संकट और बढ़ता सामाजिक ध्रुवीकरण इन समस्याओं को और गंभीर बना रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया को ईमानदार नेतृत्व और मजबूत, स्वतंत्र संस्थानों की जरूरत है, जो जनहित की रक्षा कर सकें।

