बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कांग्रेस पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी सोच के कारण बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना करनी पड़ी।उन्होंने कहा कि लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने दलितों के अधिकारों और सम्मान के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक केंद्र में शासन किया, लेकिन दलितों के मसीहा और भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर को उस समय उचित सम्मान नहीं दिया गया।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कांग्रेस ने अपने शासनकाल में डॉ. अंबेडकर को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित नहीं किया, तो वह अब मान्यवर कांशीराम को इस सम्मान से कैसे नवाज सकती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब मान्यवर कांशीराम का निधन हुआ था, तब केंद्र में सत्ता में रही कांग्रेस सरकार ने उनके सम्मान में एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। इसके साथ ही उन्होंने उस समय उत्तर प्रदेश में रही समाजवादी पार्टी की सरकार पर भी आरोप लगाया कि राज्य स्तर पर भी कोई राजकीय शोक घोषित नहीं किया गया।
मायावती ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दल और कुछ संगठन समय-समय पर कांशीराम के नाम का इस्तेमाल कर दलित समाज का समर्थन हासिल करने की कोशिश करते रहे हैं। उनका आरोप था कि कई पार्टियां मिलकर BSP को कमजोर करने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रही हैं, इसलिए पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
इसके साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि 15 मार्च 2026 को मान्यवर कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में सफल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि कांशीराम के विचारों और संघर्षों को आगे बढ़ाना ही पार्टी का मुख्य उद्देश्य है।

