उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज यौन शोषण के मुकदमे ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह मामला उस समय सामने आया जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रयागराज में शंकराचार्य और उनके एक सहयोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद जहां शंकराचार्य चर्चा के केंद्र में आए, वहीं आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी खुद भी गंभीर विवादों में घिर गए हैं।
शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए आशुतोष को “हिस्ट्रीशीटर” बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ दो दर्जन से अधिक संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें गौ-हत्या, बलात्कार, ठगी और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए गए हैं। इसके बाद पुलिस रिकॉर्ड खंगाले जाने लगे और आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास को लेकर कई जानकारियां सामने आईं।
पुलिस दस्तावेजों के अनुसार, आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय उर्फ अश्वनी सिंह के खिलाफ वर्ष 2002 से विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। उनका नाम शामली जिले के कांधला थाने में दर्ज हिस्ट्रीशीट नंबर 76A में शामिल बताया जाता है। वे मौजा रायजादगंज के निवासी बताए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उनके खिलाफ शामली, गोंडा, मुजफ्फरनगर और लखनऊ सहित कई जिलों में मामले दर्ज हैं।
दस्तावेजों में गौवध निषेध अधिनियम के तहत गौ-हत्या और तस्करी से जुड़े कई मामलों का उल्लेख है। गोंडा में गो-तस्कर माजिद हसन के साथ मिलकर रिश्वत देने की कोशिश के आरोप में भी केस दर्ज होने की बात सामने आई है। उस मामले में तत्कालीन एसपी नवनीत राणा द्वारा स्टिंग ऑपरेशन कर कार्रवाई किए जाने का उल्लेख मिलता है। मुकदमा संख्या 1175/12 के तहत 3/5 गौवध अधिनियम और 8, 9, 10 एंटी करप्शन एक्ट के प्रावधानों में मामला दर्ज बताया गया है।
इसके अलावा, बलात्कार के गंभीर आरोप भी दर्ज बताए जाते हैं। धारा 376 के तहत एक विधवा महिला आभा वर्मा के साथ कथित गैंगरेप मामले में आशुतोष के साथ अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं। एक दलित महिला से दुष्कर्म के आरोप में भी केस दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
वहीं, आशुतोष ब्रह्मचारी स्वयं को सहारनपुर की शाकुम्भरी पीठ से जुड़ा संत बताते हैं। हालांकि, उनके दावों और पुलिस रिकॉर्ड के बीच विरोधाभास को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, एक ओर जहां शंकराचार्य पर दर्ज मुकदमे की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मामले ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक बहस छेड़ दी है।

