अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों में दिखने लगा है, जिसमें भारत भी शामिल है। भले ही भारत इस युद्ध से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की कीमतों पर असर पड़ रहा है। इसका प्रभाव देश में रसोई गैस की कीमतों से लेकर उद्योगों और सार्वजनिक सेवाओं तक देखने को मिल रहा है।
हाल ही में तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 913 रुपये हो गई है। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित न होने दी जाए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात का असर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है।
दरअसल, भारत अपनी कुल गैस जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की बड़ी भूमिका है। गैस को बड़े टैंकर जहाजों के जरिए समुद्री रास्तों से भारत लाया जाता है। लेकिन 1 मार्च के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है।
गैस सप्लाई प्रभावित होने का असर अब उद्योगों पर भी दिखने लगा है। गुजरात के मोरबी इलाके में फ्यूल गैस की कमी के कारण करीब 100 फैक्ट्रियों को अपना उत्पादन बंद करना पड़ा है। ये सभी इकाइयां सिरेमिक उद्योग से जुड़ी हैं। मोरबी को टाइल और घड़ी निर्माण के लिए दुनिया के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में करीब 400 और फैक्ट्रियों के बंद होने का खतरा है।
इस संकट का असर सार्वजनिक सेवाओं तक भी पहुंच गया है। महाराष्ट्र के पुणे शहर में गैस की कमी के कारण नगर निगम ने 18 गैस आधारित शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। प्रशासन का कहना है कि जैसे ही गैस की आपूर्ति सामान्य होगी, इन श्मशान घाटों को फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
दूसरी ओर, रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता का असर बाजार में भी दिखाई दे रहा है। कोलकाता में इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों, खासकर इंडक्शन कुकर की मांग तेजी से बढ़ गई है। शहर के चांदनी मार्केट और एज्रा स्ट्रीट जैसे बड़े बाजारों में दुकानदारों का कहना है कि इंडक्शन कुकर की बिक्री लगभग तीन गुना तक बढ़ गई है। लोग गैस के विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, उद्योग और आम लोगों के दैनिक जीवन पर और अधिक गहरा हो सकता है। फिलहाल सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

