पूर्वी भारत का तट आज एक गंभीर मौसमीय संकट की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि चक्रवाती तूफान Montha तेजी से विकास कर रहा है और आंध्र प्रदेश के तट पर आज शाम या रात तक आघात करने की संभावना है।
यह तूफान फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बना हुआ है और India Meteorological Department (IMD) के मुताबिक यह अगले कुछ घंटों में “गंभीर चक्रवाती तूफान” (Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी में बदल सकता है।
तटवर्ती इलाकों में प्रशासन ने पहले ही अलर्ट जारी कर रखा है। आंध्र प्रदेश के कई जिलों को रेड और ऑरेंज अलर्ट के दायरे में रखा गया है।
घटना की तैयारी में निम्न-प्रमुख पहलू शामिल हैं:
तटवर्ती जिलों में उच्चतर लहरें (2–4.7 मीटर) आ सकती हैं, जिससे समुद्री किनारे एवं कम ऊँचाई वाले क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।
हवाओं की रफ्तार 90–100 कि.मी./घंटा तक पहुँच सकती है तथा क्षणिक झोंके 110 कि.मी./घंटा तक भी दर्ज हो सकते हैं।
27–29 अक्टूबर के बीच कुछ स्थानों पर 20 सेमी से भी अधिक भारी बारिश की आशंका है।
तटीय राज्य ओडिशा, तमिल नाडु और पश्चिम बंगाल भी इस तूफान की चपेट में आने के लिए तैयार हैं।
प्रशासन ने कई सुरक्षा-उपाय भी लागू कर दिए हैं:
आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा में प्रभावित क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित shelters (सुरक्षा शिविरों) में स्थानांतरित किया जा रहा है।
रेलवे एवं विमान सेवा में रद्दीकरण हुआ है — रेलवे ने 60 से अधिक ट्रेनों को रद्द कर दिया है।
बस सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है और रात भर की व्यवस्था के लिए प्रशासन सतर्क है।
किसानों को भी खेतों में जाने-आने से बचने और फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
इस तूफान की दिशा, गति और प्रभाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। विशेष रूप से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से अनुरोध है कि वे सरकारी निर्देशों का पालन करें, बाहर निकलने से बचें, बिजली कटौती या अन्य आपात स्थिति के लिए तैयार रहें।
प्रकृति ने एक बार फिर याद दिलाया है कि सतर्कता जीवन रक्षा करती है — और इस समय पूर्वी तट की जनता की सुरक्षा और समय पर प्रतिक्रिया ही इस आपदा को नियंत्रित करने की कुंजी बनेगी।

