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ट्रंप के 100% टैरिफ पर चीन का तीखा हमला: ‘गलत तरीके सुधारो’… अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी l

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में भूचाल ला दिया है। चीन ने इस कदम को “गैर-जरूरी और अनुचित” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका इस फैसले से पीछे नहीं हटता या टैरिफ कम नहीं करता, तो बीजिंग अपने हितों की रक्षा के लिए “उचित और कठोर कदम” उठाएगा।

बीजिंग के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:
“ये गलत तरीके हैं, इन्हें सुधारो। अमेरिका को तुरंत इन संरक्षणवादी नीतियों से पीछे हटना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो चीन किसी भी कीमत पर अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां वैश्विक व्यापार व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं और इससे दुनिया भर की सप्लाई चेन प्रभावित होगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कैंपेन रैली में कहा कि यह 100% टैरिफ चीन को “अमेरिका का आर्थिक शोषण” बंद करने के लिए मजबूर करेगा। उन्होंने दावा किया कि चीन की निर्यात नीति अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान पहुँचा रही है और लाखों नौकरियां खत्म हुई हैं। ट्रंप ने अपने समर्थकों से वादा किया कि अगर वे दोबारा राष्ट्रपति बने, तो चीन पर और भी कड़े आर्थिक कदम उठाए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इस टैरिफ युद्ध का असर सिर्फ अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर व्यापक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

यूरोपीय यूनियन के कुछ सदस्य देशों ने भी चिंता जताई है कि अमेरिका के इस निर्णय से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी।

एशियाई देशों के व्यापार संगठनों ने चेतावनी दी है कि इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई में बाधाएं आ सकती हैं।

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विवाद पिछले एक दशक से जारी है। ट्रंप प्रशासन के दौरान ही 2018 में विशाल टैरिफ युद्ध शुरू हुआ था, जिसमें सैकड़ों अरब डॉलर के चीनी सामानों पर ऊँचे टैरिफ लगाए गए थे। बाद में कुछ समझौते हुए, लेकिन टकराव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

विश्लेषकों का मानना है कि चीन अमेरिका से आयातित कृषि उत्पादों, तकनीकी उपकरणों और ऊर्जा संसाधनों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकता है। साथ ही बीजिंग विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मंच पर इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर सकता है।
वांग वेनबिन ने कहा, “हम किसी संघर्ष को बढ़ाना नहीं चाहते, लेकिन अगर अमेरिका अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करता, तो हम मजबूर होंगे।”

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