अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष समेत आठ युद्धों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह सब नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नहीं किया। पिछले समय में ट्रंप बार-बार यह कहते आए हैं कि वे शांति स्थापित करने में माहिर हैं और कई क्षेत्रों में युद्ध रोकने का श्रेय खुद को देते हैं।
नोबेल शांति पुरस्कार 2025 के विजेता घोषित होने के बाद ट्रंप को यह सम्मान नहीं मिला, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें पुरस्कार के लिए पुनः नॉमिनेट किया। शरीफ ने कहा कि दुनिया को इस समय ट्रंप जैसे नेता की सबसे ज्यादा जरूरत है, जिन्होंने भारत-पाकिस्तान के संघर्ष को नियंत्रण में रखा। उन्होंने कहा, “यह सज्जन एक बार फिर दुनिया को बड़े संकट से बचा सकते हैं।”
ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में बताया कि वे अबतक सात युद्धों को खत्म करने का श्रेय लेते हैं, जिनमें भारत-पाकिस्तान का संघर्ष भी शामिल है। उन्होंने गाजा युद्ध को भी जोड़कर अब इसे आठ युद्ध बताया है जिनको वे रोकने में सफल हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को सुलझाने की योजना का भी संकेत दिया।
वहीं, नोबेल कमेटी द्वारा यह पुरस्कार वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक नेता मारिया कोरिना मचाडो को देने के बाद व्हाइट हाउस ने नोबेल समिति की आलोचना की है, इसे राजनीतिक प्राथमिकता देने और ट्रंप के शांति प्रयासों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस के संचार निदेशक ने कहा कि नोबेल समिति द्वारा ट्रंप को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए अपमान है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की नोबेल पुरस्कार के लिए दावेदारी प्रशासनिक नियमों और राजनीतिक कारणों से कमजोर रही, लेकिन वे विदेश नीतिगत संघर्षों और युद्ध विराम में अपनी भूमिका को पुख्ता बताते हैं। ट्रंप इस विषय पर लगातार जोर देते हैं कि उन्होंने वास्तव में कई युद्धों को रोका है, और वे भविष्य में भी शांति स्थापना की कोशिश जारी रखेंगे।

