मथुरा, उत्तर प्रदेश — बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बुधवार को मथुरा में जन्मभूमि क्षेत्र से मंदिर निर्माण का संकल्प लेते हुए सनातन धर्म के प्रति आस्था, एकता और जागरूकता का संदेश दिया। इसी के साथ उन्होंने ‘सनातन एकता पदयात्रा’ की घोषणा की, जो वृंदावन से दिल्ली तक निकाली जाएगी। इस यात्रा का उद्देश्य, देश में फैल रहे सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों के पुनर्जागरण का संदेश देना बताया जा रहा है।
ब्रजभूमि की पवित्र भूमि पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि “अब समय आ गया है कि पूरे भारत में सनातन धर्म की एकता का स्वर गूंजे। वृंदावन से शुरू होकर दिल्ली तक यह पदयात्रा उसी आह्वान का प्रतीक होगी।” उन्होंने ब्रजवासियों से विशेष आग्रह किया कि वे इस यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने आचरण व विश्वास से समाज को एकजुट करने का संदेश दें।
इस अवसर पर उपस्थित भक्तों ने “जय श्रीराम” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से वातावरण गूंजा दिया। शास्त्री जी ने कहा कि मथुरा, काशी, अयोध्या, और उज्जैन जैसी धार्मिक नगरीयां भारत की आत्मा हैं और इन स्थानों से उठने वाली आवाज पूरे राष्ट्र को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि इस पदयात्रा का एक प्रमुख लक्ष्य यह भी रहेगा कि लोगों को सनातन संस्कृति, गौ-सेवा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रप्रेम जैसे मूल्यों के प्रति सजग किया जाए।
धार्मिक आयोजनों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा अगले महीने से शुरू होगी और हजारों साधु-संत, भक्त एवं युवा इसमें शामिल होंगे। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर सत्संग, भजन-कीर्तन, और समाजिक समरसता पर प्रवचन होंगे। वृंदावन से रवाना होकर यह यात्रा मथुरा, फरीदाबाद, और गुरुग्राम होते हुए दिल्ली पहुंचेगी, जहां विशाल सभा का आयोजन किया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस यात्रा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई धार्मिक संगठनों ने पहले ही अपना समर्थन जताया है, जबकि स्थानीय प्रशासन यात्रा के रूट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारी में जुट गया है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अंत में कहा, “यह पदयात्रा केवल यात्रा नहीं होगी, यह धर्म, देश और संस्कृति की पुनः स्थापना का आह्वान है। सनातन धर्म हमारी पहचान है, और इसे जीवित रखना हम सबका कर्तव्य है।”

