बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मोड़ पर, Jokihat (जोकिहाट) विधानसभा क्षेत्र — जो कि Araria जिले के सीमांचल क्षेत्र में आता है — इस बार चुनावी पटल पर बेहद गरमाता हुआ दिखाई दे रहा है। इस सीट पर चार ऐसे ‘आलम’ प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें दो सगे भाई आमने-सामने हैं, साथ ही तीन पूर्व मंत्री भी इस मुकाबले में उतर चुके हैं।
यह राजनीतिक ड्रामा इसलिए भी खास है क्योंकि 2020 के विधानसभा चुनाव में All India Majlis -e‑Ittehadul Muslimeen (AIMIM) ने इस सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन उसके बाद उस विधायक ने Rashtriya Janata Dal (RJD) में शामिल हो गए। इस बार AIMIM फिर से प्रभाव जमाने की तैयारी में है, जिससे वोटों का विभाजन और गहरा हो गया है।
जोकिहाट विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और यहाँ मुस्लिम मतदाता करीब ६५ प्रतिशत के आसपास पाए जाते हैं।
यह सीट लंबे समय से सीमांचल की राजनीति में अहम रही है क्योंकि यहाँ की राजनीति में प्रभावित रहा है Mohammad Taslimuddin का परिवार।
टसलीमुद्दीन चार-पाँच बार खुद विधायक रह चुके हैं, फिर सांसद भी बने थे। अब उनका राजनीतिक विरासत इस सीट पर उनके दोनों बेटे — Sarfaraz Alam और Shahnawaz Alam — के बीच टकराव के रूप में सामने है।
प्रमुख प्रत्याशी और राजनीतिक समीकरण
Sarfaraz Alam वरिष्ठ है, लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने Jokihat से विधायक भी रह चुके हैं।
Shahnawaz Alam छोटे भाई हैं, २०२० में AIMIM के टिकट पर जीतकर आगे आए और बाद में RJD में शामिल हुए।
इसके अलावा इस बार नीति-निर्माण में सक्रिय दलों ने अन्य बड़े नाम भी उतारे हैं, जिनमें कई पूर्व मंत्री शामिल हैं। जोकीहाट में कुल चार ‘आलम’ नाम वाले प्रत्याशी हैं, जिससे यह पूरा सामना और जटिल बन गया है। l
AIMIM इस बार फिर से इस सीट को लेकर मजबूत दावेदार है, जिससे मुस्लिम वोटों का विभाजन हो सकता है।
क्यों इस सीट पर चर्चा ज्यादा हो रही है?
भाई-भाई का मुकाबला: जब राजनीतिक परिवार में दो बेटे अलग-अलग मोर्चे पर हों, तो पारिवारिक व विरासत सम्बन्धी जटिलताएं सामने आती हैं। Jokihat में यही स्थिति है।
वोट बंटवारा-भावना: मुस्लिम मतदाता यहां बहुसंख्यक हैं, लेकिन चार एक जैसे नाम वाले प्रत्याशियों के कारण वोट बंटवारा संभव है। इससे सीट का समीकरण बदल सकता है।
दिग्गजों की एंट्री: तीन-चार पूर्व मंत्री इस इलाके से चुनाव लड़ने उतर चुके हैं, जिससे राजनीतिक आलोक बढ़ा है।
पुराने आधार का असर: यह सीट हमेशा से इस परिवार की ज़मीन रही है; लेकिन पिछले चुनाव में AIMIM ने जीत दर्ज की थी, जिससे पारंपरिक समीकरण बदलने लगे हैं।
इलाके की चुनौतियाँ और वोटरों की उम्मीदें
जोकिहाट का इलाका सीमांचल के अंदर आता है, जहाँ सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ हैं: कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, सीमित गैर-कृषि रोजगार, तथा प्रवासी श्रमिकों की समस्या।
वोटर अब पारिवारिक पहचान मात्र से ज्यादा विकास-प्रस्ताव, रोजगार-सृजन, बुनियादी ढाँचे और जन-सेवाओं की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में प्रत्याशियों को सिर्फ नाम-वरासत या जाति/धर्म आधार पर नहीं बल्कि काम के आइडिया पर खुद को साबित करना होगा।
जोकिहाट सीट इस बार इसलिए खास बनी है क्योंकि यह सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं रहा; यह एक परिवार के भीतर राजनीतिक टकराव, वोट बैंक का टूट-फूट, और दल-परिवर्तन का परिदृश्य बन चुका है। दो भाई-प्रतिद्वंदी, एक विरासत-परिवार की छाँव, तीन-चार पूर्व मंत्री, और एक पार्टी (AIMIM) का कम-कमाल पुन: प्रवेश — इन सबने इस सीट को बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव का ताश का पत्ता बना दिया है।
चुनाव परिणाम चाहे कुछ भी हो, Jokihat विधानसभा मामला यह दर्शाएगा कि सीमांचल में राजनीतिक ताकत-संतुलन, परिवार-राजनीति और विकास-उम्मीदों के बीच भविष्य किस दिशा में मुड़ रहा है।

