बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने महागठबंधन पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने विपक्ष पर झूठे वादे करने और एनडीए की योजनाओं की नकल करने का आरोप लगाया।
चिराग पासवान ने कहा कि महागठबंधन के नेताओं को अब यह समझ आ गया है कि बिहार की जनता उनके साथ नहीं है। उन्होंने कहा, “विपक्ष सत्ता में आने वाला नहीं है, इसलिए लोगों को गुमराह करने के लिए झूठे वादे किए जा रहे हैं। जिन योजनाओं को एनडीए सरकार ने जमीन पर उतारा, अब वही योजनाएं विपक्ष अपने घोषणापत्र में कॉपी कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार तेजी से विकास की राह पर है। एनडीए ने बिजली, सड़क, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में जो काम किए हैं, वही जनता के सामने असली विकास की तस्वीर पेश करते हैं। चिराग ने दावा किया कि इस बार बिहार की जनता जाति और भावनाओं से ऊपर उठकर काम और विकास के आधार पर वोट करेगी।
चिराग ने कहा कि विपक्ष हर बार चुनाव से पहले मुफ्त की योजनाओं का झांसा देकर जनता को बहकाने की कोशिश करता है, लेकिन लोग अब सब समझ चुके हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि “जो लोग 15 साल तक सत्ता में रहकर बिहार को बेरोजगारी और पलायन की राजधानी बना चुके हैं, अब वही लोग रोजगार देने की बातें कर रहे हैं — यह मज़ाक नहीं तो और क्या है?”
उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए के खिलाफ नकारात्मक राजनीति करने से विपक्ष को कुछ हासिल नहीं होगा। जनता जानती है कि किसने बिहार में स्थिरता दी और किसने अराजकता फैलाई।
चिराग पासवान ने दावा किया कि एनडीए गठबंधन इस बार भी प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटेगा। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार का अनुभव और मोदी जी का विज़न बिहार की प्रगति की गारंटी है। हमने वादे नहीं, काम करके दिखाया है। यही हमारा भरोसा और ताकत है।”
चिराग पासवान इन दिनों बिहार के कई जिलों में दौरे कर रहे हैं। उन्होंने जनसभाओं में युवाओं से अपील की कि वे भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि अपने भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करें। उन्होंने कहा कि बिहार को अब “राजनीतिक प्रयोगशाला” नहीं, बल्कि “विकास की प्रयोगशाला” बनाना होगा।
बिहार चुनाव में जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, राजनीतिक हमले और पलटवार तेज होते जा रहे हैं। चिराग पासवान का यह बयान महागठबंधन पर दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। एनडीए की ओर से यह साफ संदेश है कि वह चुनाव को “विकास बनाम वादों” के मुद्दे पर लड़ने की रणनीति बना चुका है।

