बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी ने सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रितु जायसवाल समेत 27 बागी नेताओं को तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी अब बगावत और अंदरूनी असंतोष को काबू में लेने के मूड में नजर आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने, निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन देने और आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने के आरोप लगे थे। आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने अनुशासन समिति की सिफारिश पर इन सभी को निलंबित करने का आदेश जारी किया।
रितु जायसवाल बिहार की जानी-मानी महिला नेता हैं और शिवहर की पूर्व मुखिया रह चुकी हैं। वे आरजेडी की महिला विंग में सक्रिय थीं और पार्टी में संगठनात्मक मजबूती की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उन्हें तेजस्वी यादव की नजदीकी नेताओं में गिना जाता था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी और स्वतंत्र रुख अपनाने के चलते उनके खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा था।
आरजेडी ने बयान जारी करते हुए कहा — “चुनाव के इस अहम दौर में पार्टी अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं करेगी। जिन नेताओं ने संगठन के खिलाफ जाकर काम किया है, उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।”
सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव ने खुद इस कार्रवाई को मंजूरी दी, ताकि पार्टी के भीतर कोई गलत संदेश न जाए।
जानकारी के मुताबिक, जिन 27 नेताओं पर कार्रवाई हुई है, उनमें शिवहर, सीतामढ़ी, दरभंगा, सहरसा और पूर्णिया जिलों के कई स्थानीय पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें से कुछ नेताओं पर एनडीए प्रत्याशियों से गुप्त रूप से तालमेल रखने और निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देने के आरोप भी हैं।
पार्टी हाईकमान का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले ऐसे कदम उठाना जरूरी था, ताकि शेष संगठन में एकता और अनुशासन का संदेश जाए।
तेजस्वी यादव ने इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया कि पार्टी में “एक व्यक्ति, एक विचार” की नीति लागू होगी। उन्होंने कहा, “जो हमारे साथ हैं, वे पूरी निष्ठा से रहें। और जिन्हें दूसरी दिशा में जाना है, वे खुलकर जाएं — लेकिन दो नावों की सवारी अब नहीं चलेगी।”
आरजेडी के इस एक्शन को बिहार चुनाव में “डैमेज कंट्रोल” के तौर पर देखा जा रहा है। चुनावी मैदान में बिखराव से बचने के लिए पार्टी ने अब सख्त रवैया अपनाया है। हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि यह कार्रवाई आरजेडी के अंदर बढ़ती असंतुष्टि का संकेत है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि “तेजस्वी यादव को अपनी ही पार्टी संभालनी मुश्किल हो रही है, जनता को संभालना तो दूर की बात है।” वहीं आरजेडी का कहना है कि यह अनुशासन और संगठन की मजबूती का प्रतीक है, डर या असंतोष का नहीं।
बिहार विधानसभा चुनाव के इस निर्णायक दौर में आरजेडी की यह कार्रवाई राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। रितु जायसवाल जैसी प्रभावशाली नेता को बाहर करना पार्टी के लिए एक साहसिक कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि यह सख्ती आरजेडी को एकजुट रखेगी या नए बागियों को जन्म देगी।

