बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली भारी जीत ने राजनीतिक माहौल बदल दिया है। 243 में से 202 सीटों पर जीत हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नतीजे को “तूफान” बताया और कहा कि बिहार के जनादेश ने 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव की दिशा भी तय कर दी है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि गंगा बिहार से बहते हुए बंगाल पहुंचती है, और जिस तरह बिहार ने परिवर्तन का रास्ता चुना है, उसी तरह बंगाल भी भाजपा का साथ देगा। उन्होंने राज्य में “जंगल राज” होने का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल से भी इसे हटाया जाएगा।
बिहार में एनडीए की जीत ने विपक्ष को बहुत पीछे छोड़ दिया है। राजद और कांग्रेस गठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट गया। 2020 के मुकाबले राजद को आधे से भी कम सीटें मिलीं और कांग्रेस दहाई तक नहीं पहुंच सकी। इस हार ने महागठबंधन की रणनीति और लोकप्रियता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि विपक्ष की ‘MY तुष्टिकरण राजनीति’ पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की महिलाएं और युवा मिलकर बिहार की राजनीति में नया ‘MY’ समीकरण बना रहे हैं, जिसने विपक्ष का गेम बदल दिया।
पीएम मोदी के बंगाल संबंधी बयान के बाद वहां की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का दावा “भ्रम” है और 2026 में ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। टीएमसी ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी को आईएनडीआईए गठबंधन का राष्ट्रीय चेहरा बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वे गठबंधन की सबसे मजबूत नेता हैं।
टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने पीएम मोदी के “जंगल राज” वाले बयान को गलत राजनीतिक आकलन बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की ‘नफरत की राजनीति’ पहले भी नाकाम रही है और 2026 में भी जनता उसे स्वीकार नहीं करेगी। घोष ने यह दावा भी किया कि बंगाल देश के सुरक्षित राज्यों में गिना जाता है और भाजपा को उत्तर प्रदेश के उन्नाव, हाथरस और प्रयागराज जैसे मामलों को देखकर समझना चाहिए कि असली जंगल राज कहाँ है।
बिहार की जीत के बाद अब राजनीतिक नजरें पूरी तरह से 2026 के बंगाल चुनाव पर टिक चुकी हैं, जहां भाजपा और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर तय मानी जा रही है।

