Amazon Leo अमेजन की वैश्विक इंटरनेट सर्विस योजना है, जो दुनिया के दूर-दराज और नेटवर्क-विहीन इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य रखती है. इसे पहले Project Kuiper के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसका नाम बदलकर Amazon Leo कर दिया गया है ताकि इसका सीधा संबंध LEO यानी Low-Earth-Orbit satellites से समझा जा सके. अमेजन हजारों छोटे लेकिन शक्तिशाली satellites लॉन्च कर रहा है, जो धरती से करीब 590 से 630 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाते हुए इंटरनेट सिग्नल भेजेंगे. यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल एलन मस्क की Starlink कर रही है. इसी वजह से Amazon Leo को Starlink का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है, और अंतरिक्ष में इंटरनेट की सबसे बड़ी जंग अब शुरू होने वाली है।
Amazon Leo का उद्देश्य दुनिया के उन इलाकों को तेज और भरोसेमंद इंटरनेट से जोड़ना है, जहां केबल बिछाना या मोबाइल टावर लगाना मुश्किल और बेहद महंगा होता है. पहाड़ी इलाके, रेगिस्तान, जंगल, हिमांचल, दूर-दराज के गांव और समुद्री क्षेत्र इस तकनीक से जुड़ सकेंगे. Amazon Leo के 153 satellites अभी LEO orbit में मौजूद हैं और कंपनी 3,000 से ज्यादा satellites तैनात करने की योजना बना चुकी है. इसके लिए अमेजन ने 80 से अधिक रॉकेट लॉन्च बुक किए हैं, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा commercial launch contract माना गया है. यह प्रोजेक्ट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें SpaceX, Blue Origin और United Launch Alliance जैसी बड़ी लॉन्च कंपनियों की साझेदारी है।
Amazon Leo का पूरा सिस्टम तीन हिस्सों में काम करता है—ग्राउंड स्टेशन, LEO satellites और कस्टमर टर्मिनल. ग्राउंड स्टेशन secure data को भेजने और रिसीव करने का काम करते हैं, जबकि सैटेलाइट्स इन सिग्नल्स को आगे यूजर्स तक पहुंचाते हैं. उपभोक्ताओं के लिए तीन तरह के इंटरनेट टर्मिनल बनाए जा रहे हैं—Leo Nano, जो 100 Mbps तक स्पीड देगा; Leo Pro, जो 400 Mbps तक स्पीड देने में सक्षम होगा; और Leo Ultra, जिसकी स्पीड 1 Gbps तक जा सकती है. ये स्पीड स्ट्रीमिंग, वीडियो कॉल, गेमिंग, ऑफिस वर्क और हाई डेटा यूज के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
Amazon Leo का संचालन Redmond, Washington से होता है, जबकि Kirkland में इसकी आधुनिक satellite factory है, जहां रोजाना पांच satellites बनाने की क्षमता है. Florida के Kennedy Space Center में इसका processing center तैयार किया गया है, जहां से satellites को लॉन्च से पहले अंतिम रूप दिया जाता है. अमेजन की कोशिश है कि सैटेलाइट इंटरनेट की स्पीड, विश्वसनीयता और कीमत तीनों में सुधार किया जाए ताकि Starlink की तुलना में एक मजबूत विकल्प पेश किया जा सके।
कंपनी 2025 के आखिर में Amazon Leo का पहला enterprise rollout शुरू करेगी. इसके बाद 2026 में इसे दुनिया के विभिन्न देशों में उपलब्ध कराया जाएगा. टेक विशेषज्ञ इस प्रोजेक्ट को अंतरिक्ष इंटरनेट की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा की शुरुआत मान रहे हैं. Starlink और Amazon Leo की रेस आने वाले समय में दुनिया के इंटरनेट ढांचे को पूरी तरह से बदल सकती है, खासकर उन क्षेत्रों के लिए जहां आज भी इंटरनेट एक सपना है।

