बांग्लादेश में उथल-पुथल तेज हो गई है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद ढाका की सड़कों पर तनाव बढ़ गया है और लोग एक बार फिर प्रदर्शन करने लगे हैं। हसीना के समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे न्याय की जीत बता रहे हैं। इसी अशांति के बीच बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) खालिलुर रहमान अचानक तय समय से एक दिन पहले भारत पहुंच गए, जिससे यह दौरा और भी सुर्खियों में आ गया। मंगलवार शाम करीब 6:30 बजे रहमान नई दिल्ली पहुंचे, जहां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनका स्वागत किया। उनके अचानक आने के पीछे की वजह को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
शेख हसीना पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग कराने के आरोप लगे थे। ट्रिब्यूनल ने उन्हें क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी के मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है, जिसमें उम्रकैद वाला मामला भी शामिल है। 2024 के तख्तापलट के बाद वह भारत में रह रही हैं। इस फैसले ने बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर अस्थिर कर दिया है। हसीना के घर पर हमला हुआ और राजधानी ढाका में तनाव बना हुआ है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने इस फैसले को ‘अवैध और अमान्य’ बताया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
इसी बीच रहमान का भारत आना कई मायनों में अहम माना जा रहा है। आधिकारिक रूप से उनका दौरा 19-20 नवंबर को होने वाली कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) की 7वीं NSA-स्तरीय बैठक के लिए है। भारत, श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस और बांग्लादेश के साथ यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा करता है। बुधवार को रहमान सदस्य देशों के शीर्ष अधिकारियों के साथ डिनर में शामिल होंगे और गुरुवार को NSA अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे। हालांकि, बांग्लादेश में शेख हसीना को मिली सजा और उसके बाद शुरू हुई हिंसा को देखते हुए माना जा रहा है कि इस यात्रा में हसीना से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है।
बांग्लादेश में हसीना के खिलाफ फैसले ने राजनीतिक अस्थिरता को गहरा दिया है। रहमान का पहले आना इस बात का संकेत हो सकता है कि ढाका भारत से कूटनीतिक स्तर पर समर्थन या कम से कम परामर्श चाहता है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों के वर्तमान तनावपूर्ण दौर में यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

