बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम रहा, जब जनसुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक बड़ा और भावनात्मक ऐलान कर दिया। पश्चिम चंपारण के भितिहरवा में एक दिन के मौन उपवास के बाद उन्होंने घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में उनकी जितनी भी आमदनी होगी, उसका कम से कम 90 प्रतिशत जनसुराज अभियान को दान किया जाएगा। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि बीते 20 वर्षों में अर्जित उनकी पूरी चल-अचल संपत्ति—दिल्ली में अपने परिवार के लिए एक घर को छोड़कर—जनसुराज को समर्पित कर दी जाएगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की गरीब जनता की उम्मीद को आर्थिक बाधाओं के कारण टूटने नहीं दिया जाएगा और आंदोलन को कभी धन की कमी नहीं रोकेगी।
उन्होंने साफ कहा कि बिहार के बदलाव की लड़ाई आसान नहीं है, पर पैसे की वजह से इसे रुकने नहीं दिया जाएगा, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े। PK ने बिहारवासियों और जनसुराज से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं से भी आर्थिक योगदान की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर वह अपनी आय का 90 प्रतिशत दे सकते हैं, तो बाकी लोगों से केवल 10 प्रतिशत भी नहीं मांगा जा रहा। उन्होंने कहा कि जनसुराज से जुड़े हर व्यक्ति को कम से कम 1,000 रुपये का योगदान देना चाहिए। उनका कहना था कि यदि बिहार के 13 करोड़ लोगों में से सिर्फ 1 करोड़ लोग 1,000 रुपये भी दें, तो अगलें पांच वर्षों तक यह अभियान किसी ताकत से रुक नहीं पाएगा।
उपवास के अनुभव को साझा करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता था कि वह पूरा 24 घंटे का उपवास कर पाएंगे या नहीं। लेकिन अब से वह हर सप्ताह एक दिन जनसुराज के लिए उपवास रखेंगे। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं और मीडिया का आभार जताया और कहा कि कठिन समय में गांधी आश्रम ने उन्हें फिर से प्रेरणा दी है।
चुनावी हार और राजनीतिक हालात पर बात करते हुए PK ने कहा कि कठिन समय चुनाव हारने के कारण नहीं है, बल्कि बिहार में लोकतंत्र पर हुए हमले की वजह से है। उन्होंने स्वीकार किया कि अभियान में कुछ कमियां रहीं और पदाधिकारियों को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनसुराज एक आंदोलन था, है और आगे भी आंदोलन ही रहेगा। जो चरित्र, ईमानदारी और निष्ठा की बात कही गई थी, उसे अपनाने में कमी रह गई, और अब हर पदाधिकारी को सोचना होगा कि क्या वह जनसुराजी कहलाने लायक है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को सरकार के वादों पर लगातार निगरानी रखने और जनता की आवाज अदालत तक पहुंचाने के लिए एक बार फिर प्रेरित किया। प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनावी नतीजों ने भले चुनौती खड़ी की हो, लेकिन बिहार के लोगों के मन में बदलाव की उम्मीद पहले से अधिक मजबूत हुई है। लाखों लोगों को अब भरोसा है कि बिहार में शिक्षा, रोजगार और विकास संभव है और पलायन रुक सकता है।
अंत में उन्होंने कहा कि जनसुराज की यात्रा अब उनकी नहीं, बिहार की जनता के हाथ में है। यह आंदोलन लाखों लोगों की उम्मीदों से जुड़ा है और संघर्ष जारी रहेगा।

