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राम मंदिर पर धर्मध्वजा के साथ PM मोदी का संकल्प—2047 तक समरस और सशक्त भारत

अयोध्या में भव्य राम मंदिर पर धर्मध्वजा फहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामचरितमानस की प्रसिद्ध पंक्ति— “नहीं दरिद्र, कोउ दुखी ना दीना” —का उल्लेख कर देश को एक व्यापक सामाजिक संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में यह भावना होनी चाहिए कि देश में कोई भी व्यक्ति गरीब, पीड़ित या दुखी न रहे। उनके साथ इस कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।

पीएम मोदी ने कहा कि “राम भेद से नहीं, भाव से जोड़ते हैं”, और यही भाव भारत की विकास यात्रा को दिशा दे रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीते 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, आदिवासी, युवा और किसान—हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। उनके मुताबिक, देश का हर नागरिक और हर क्षेत्र सशक्त होगा तभी भारत रामराज्य की ओर आगे बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री ने देश के भविष्य को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले 1000 वर्षों की नींव आज के समय में मजबूत करनी होगी, क्योंकि जो केवल वर्तमान का सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। उन्होंने कहा कि देश उनसे पहले भी था और आगे भी रहेगा—इसलिए समाज को दूरदर्शिता के साथ काम करना होगा।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने प्रभु राम के आदर्शों को आत्मसात करने की बात कही। उन्होंने कहा कि राम का अर्थ है—
-आदर्श,
-मर्यादा,
-धर्म पथ,
-जनता के हित,
-ज्ञान-विवेक,
-और कोमलता में दृढ़ता।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में फहराई गई यह धर्मध्वजा आने वाले युगों तक राम के आदर्शों और प्रेरणाओं का संदेश देती रहेगी।

पीएम मोदी ने राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले हर भक्त, श्रमिक, योजनाकार और कर्मवीर को नमन किया। उनके अनुसार, “सदियों की वेदना आज विराम पा रही है” और अब 2047 के लक्ष्य—विकसित भारत—की ओर बढ़ने का समय है।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में गुलामी की मानसिकता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लॉर्ड मैकाले की सोच ने भारत में हीन भावना की संस्कृति पैदा की, जिसका प्रभाव आज भी कई जगह दिखता है। उन्होंने कहा कि हमें इस मानसिकता से मुक्त होना होगा, क्योंकि भारत लोकतंत्र की जननी है और अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्भाग्य है कि एक वर्ग ने राम को नकारने की कोशिश की, जबकि अयोध्या ने दुनिया को नीति दी है और 21वीं सदी की अयोध्या दुनिया को विकास का मॉडल देगी।

उन्होंने अंत में कहा कि राम मंदिर और धर्मध्वजा केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि समरसता, विकास और राष्ट्र की नई दिशा के प्रतीक हैं।

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