लोकसभा और राज्यसभा में मंगलवार को चुनाव सुधार, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR प्रक्रिया को लेकर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी ने लोकसभा में बोलते हुए केंद्र सरकार और RSS पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षण और संवैधानिक संस्थाओं पर “पूरी तरह कब्जा” किया जा रहा है। राहुल ने दावा किया कि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से लेकर कई प्रमुख पदों पर योग्यता के बजाय खास विचारधारा वाले लोगों को बैठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब स्वतंत्र अंपायर की तरह काम नहीं कर रहा, बल्कि सत्ता पक्ष के साथ तालमेल बनाकर निर्णय ले रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने कई राज्यों में चुनावी गड़बड़ियों के उदाहरण दिए लेकिन किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए चार मांगें रखीं—machine-readable वोटर लिस्ट, CCTV फुटेज सुरक्षित रखना, EVM की स्वतंत्र जांच की सुविधा और चुनाव आयुक्तों को मिली इम्युनिटी खत्म करना। उन्होंने आरोप लगाया कि CCTV फुटेज नष्ट करना “चुनाव की चोरी” है।
राहुल के भाषण के दौरान सदन में कई बार हंगामा हुआ। जब उन्होंने नाथूराम गोडसे का जिक्र किया तो स्पीकर ओम बिरला ने विषय पर रहने की सलाह दी, जिस पर राहुल ने कहा कि वे चुनाव सुधार की पृष्ठभूमि समझा रहे हैं और उन्हें रोका नहीं जा सकता। इसी बीच किरेंन रिजिजू ने तंज किया कि राहुल अब तक चुनाव सुधार पर ठीक से बात ही नहीं कर पाए हैं।
राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी ने जोरदार पलटवार किया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि कांग्रेस आज जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, वही पार्टी अतीत में मुख्य चुनाव आयुक्तों को रिटायरमेंट के बाद “मलाईदार पद” देती रही है। दुबे ने उदाहरण दिए कि सुकुमार सेन को सूडान का दूत बनाया गया, वी.एस. रमादेवी को राज्यपाल, एम.एस. गिल को केंद्रीय मंत्री और टी.एन. शेषन को कांग्रेस का टिकट दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि राजनीतिकरण किसने किया।
निशिकांत दुबे ने जनसंख्या के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा और कहा कि 2011 में देश में मुस्लिम आबादी सिर्फ 4% बढ़ी, लेकिन बंगाल के 24 परगना में यह वृद्धि 14% कैसे हो गई? उन्होंने इसे कांग्रेस के “मुस्लिम तुष्टिकरण” की राजनीति का परिणाम बताया। दुबे ने व्यंग्य में कहा कि वे आज सदन में सिर्फ “नेहरू-इंदिरा की तारीफ” करने आए थे, लेकिन कांग्रेस की नीतियों ने उन्हें सच दिखाने पर मजबूर कर दिया।
उधर राज्यसभा में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने प्रियंका गांधी के हालिया आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष तथ्यों के बजाय अफवाहों के सहारे माहौल बना रहा है। वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान एच.डी. देवगौड़ा ने कहा कि यह गीत शुरू से देश को जोड़ता आया है और आज भी वही भूमिका निभा रहा है।
लोकसभा में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर 10 घंटे की लंबी बहस चली। अखिलेश यादव ने दावा किया कि रामपुर उपचुनाव निष्पक्ष नहीं था। वहीं मनीष तिवारी ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि कई सांसद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को मजबूर हैं।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA सांसदों की बैठक में SIR को लेकर सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जितना बड़ा जनादेश मिला है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है और सांसदों को अब पहले से ज्यादा संवेदनशीलता और मेहनत के साथ जनता के बीच काम करना होगा।
इसी दौरान इंडिगो एयरलाइंस संकट पर नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने बताया कि क्रू रोस्टरिंग की गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हुईं और DGCA ने इंडिगो को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बहस के दौरान कई सांसदों ने अपने राज्यों के उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया की खामियों को उठाया। सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया, वहीं अनिल देसाई और अभय कुमार सिन्हा ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल रखते हुए बैलेट पेपर की वापसी की मांग की।
शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने कहा कि जब 18 साल का युवा सरकार चुन सकता है, तो उसे चुनाव लड़ने का भी हक होना चाहिए। DMK के तिरुचि शिवा ने सरकार पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् पर चर्चा तो शुरू कर दी, लेकिन ट्रेज़री बेंच खाली पड़ी है।
पूरे दिन संसद में तकरार, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस जारी रही। चुनाव सुधार की शुरुआत के नाम पर आज का दिन सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक जंग में बदल गया, जिसमें RSS, चुनाव आयोग, SIR और चुनावी पारदर्शिता सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभरे।

