भारतीय क्रिकेट के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने महेंद्र सिंह धोनी को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर खुलकर अपनी बात रखी है। एक इंटरव्यू और पॉडकास्ट में मिश्रा ने साफ कहा कि उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत और आगे बढ़ने में धोनी की कप्तानी की अहम भूमिका रही। उन्होंने माना कि भले ही यह कहा जाता रहा हो कि धोनी के रहते उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर धोनी कप्तान नहीं होते तो शायद उनका टीम इंडिया में आना भी संभव नहीं होता।
अमित मिश्रा ने बताया कि उनका भारतीय टीम में चयन एमएस धोनी की कप्तानी में ही हुआ था। उन्होंने कहा कि कई बार टीम से बाहर रहने के बावजूद उन्हें दोबारा मौके मिले, और इसके पीछे कप्तान का भरोसा और सहमति अहम रही। मिश्रा का मानना है कि इस पूरे सफर को नकारात्मक नजरिये से देखने के बजाय सकारात्मक रूप में समझना ज्यादा सही है, क्योंकि हर खिलाड़ी का करियर टीम की जरूरतों और हालात पर निर्भर करता है।
स्पिन विभाग में रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा जैसे खिलाड़ियों को तरजीह मिलने के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। उनके मुताबिक, टीम संयोजन के हिसाब से फैसले लिए जाते हैं और जब भी वह प्लेइंग इलेवन में होते थे, धोनी उनसे लगातार बातचीत करते थे। कप्तान के तौर पर धोनी ने हमेशा गेंदबाजी को लेकर उनसे चर्चा की, जिससे उन्हें टीम के भीतर भरोसे और समर्थन का एहसास होता था।
मिश्रा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी आखिरी वनडे सीरीज का एक अहम किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक करीबी मुकाबले में भारत ने लगभग 260–270 रन बनाए थे और गेंदबाजी के दौरान वह विकेट लेने के बजाय रन रोकने पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे। दो ओवर के बाद धोनी उनके पास आए और कहा कि वह अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी नहीं कर रहे हैं और जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं।
धोनी की इस छोटी लेकिन सटीक सलाह का असर तुरंत दिखा। मिश्रा ने अपनी नैचुरल गेंदबाजी शुरू की और उसी मैच में पांच विकेट झटक लिए, जो मुकाबले का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। मिश्रा ने कहा कि धोनी को साफ पता था कि अगर विकेट नहीं मिले तो टीम मैच हार सकती है, और यही स्पष्ट सोच उन्हें आत्मविश्वास देती थी।
अपने करियर को याद करते हुए अमित मिश्रा ने बिना किसी अफसोस के कहा कि अगर एमएस धोनी नहीं होते, तो शायद उनका अंतरराष्ट्रीय सफर शुरू ही नहीं होता। आंकड़ों की बात करें तो मिश्रा ने भारत के लिए 22 टेस्ट में 76 विकेट, 36 वनडे में 64 विकेट और 10 टी20 मैचों में 16 विकेट लिए। उनके मुताबिक, धोनी की कप्तानी और भरोसे ने उनके करियर को सही दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।

