भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को राजनीतिक बयानबाजी में संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाकर व्यक्तिगत हमले करना उचित नहीं है। बृजभूषण का कहना है कि केवल किसी के साथ फोटो होने के आधार पर किसी को अपराधी ठहराना सही नहीं है, क्योंकि ऐसा किया जाए तो देश के कई नेताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
धनंजय सिंह को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने साफ कहा कि अगर फोटो के अलावा कोई ठोस सबूत मौजूद हैं, तो कानून को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों और जांच प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए, ताकि निष्पक्ष न्याय हो सके।
इसके साथ ही विधायक अभय सिंह और पूर्व सांसद धनंजय सिंह के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप पर भी बृजभूषण ने दोनों पक्षों को नसीहत दी। उन्होंने कहा कि 80–90 के दशक का दौर अब पीछे छूट चुका है और आज उत्तर प्रदेश में किसी तरह का गैंगवार नहीं चल रहा है। दोनों जनप्रतिनिधि हैं, उनके परिवार और बच्चे हैं, इसलिए पुरानी बातों को लेकर सार्वजनिक रूप से ‘तू-तू, मैं-मैं’ करने से बचना चाहिए।
दूसरी ओर, अखिलेश यादव का रुख इस मुद्दे पर आक्रामक बना हुआ है। लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में रास्ते और दीवार को लेकर हुए विवाद के मामले में धनंजय सिंह और उनके सहयोगी विनय सिंह पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अखिलेश ने सरकार पर निशाना साधा। मीडिया के सवाल पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब किसी को धमकाया नहीं जाएगा और लोगों को “बाटी-चोखा खाकर जाने” की सलाह दी।
अखिलेश यादव लगातार इस मामले को उठाकर सरकार पर एक खास जाति के पक्ष में काम करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, बृजभूषण शरण सिंह की सलाह को राजनीति में बढ़ते तीखे हमलों के बीच संतुलन और संयम की अपील के तौर पर देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि इस बयानबाजी का राजनीतिक असर आगे किस दिशा में जाता है।

