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जम्मू में जल संरक्षण की बड़ी पहल, 17 तालाबों के पुनरुद्धार से बढ़ी भविष्य की उम्मीद

जल संरक्षण को लेकर जम्मू शहर में किए जा रहे प्रयास भविष्य के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरे हैं। तेजी से घटते जल स्रोतों और गिरते भूजल स्तर के बीच जम्मू नगर निगम ने शहर में करीब 17 तालाबों के पुनरुद्धार का काम शुरू किया है। इसका उद्देश्य न केवल पारंपरिक जल स्रोतों को दोबारा जीवित करना है, बल्कि वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर को भी बढ़ाना है।

नगर निगम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में तालाबों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी उठाई है। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को भी अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। बड़ी इमारतों के लिए बिल्डिंग परमिशन के दौरान वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति को संभाला जा सके। पिछले दो वर्षों में दर्जनभर इमारतों को इसी शर्त के साथ अनुमति दी जा चुकी है।

हाल ही में वार्ड नंबर 55 (चिनाब कॉलेज के पास), वार्ड नंबर 68 (ग्रेटर कैलाश), वार्ड नंबर 75 (दुर्गा चक) और वार्ड नंबर 59 (पलौड़ा) में तालाबों के पुनरुद्धार का कार्य तेजी से जारी है। इन परियोजनाओं के अगले चार से पांच महीनों में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। आवास एवं शहरी विकास विभाग की देखरेख में पहले चरण में करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

इन तालाबों को पुराने स्वरूप में लौटाने के साथ-साथ वर्षा जल को उनमें पहुंचाने की उचित व्यवस्था की जा रही है। आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों की नालियों के जरिए बारिश का पानी तालाबों तक लाया जाएगा, जिससे पानी जमीन में रिसकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा। यह प्रक्रिया लंबे समय में शहर की जल जरूरतों के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है।

सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम लोग भी जल संरक्षण की दिशा में पहल कर रहे हैं। सैनिक कॉलोनी के वार्ड नंबर 70, सेक्टर-एफ में कुछ निवासियों ने अपने घरों से निकलने वाले किचन और बाथरूम के पानी को नालियों में बहाने के बजाय अलग पिट बनाकर जमीन में रिसाने की व्यवस्था की है। इससे न केवल पानी की बर्बादी रुक रही है, बल्कि गलियों और नालियों में जलभराव की समस्या भी कम हो रही है।

पूर्व पार्षद नरेंद्र सिंह बंटी का कहना है कि लोगों को जागरूक करने के बाद कई परिवार आगे आए और उन्होंने खुद यह व्यवस्था अपनाई। उनके अनुसार, ऐसे छोटे-छोटे प्रयास बड़े स्तर पर जल संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक वर्षा जल संचयन एक सरल और किफायती तकनीक है, जिसमें बारिश के पानी को बहने से रोककर उसे संग्रहित किया जाता है या जमीन में रिसने दिया जाता है। इससे पानी की कमी को पूरा करने के साथ-साथ भूजल स्तर में भी सुधार होता है।

सरकार भी इस दिशा में कई योजनाओं पर काम कर रही है। बूंद प्रोजेक्ट, जल शक्ति अभियान और जल जीवन मिशन के तहत जल स्रोतों के संरक्षण, जीआईएस मैपिंग, पुराने हैंडपंपों की मरम्मत, वृक्षारोपण और पारंपरिक जल निकायों के पुनरुद्धार पर जोर दिया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2028 तक हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि जल शक्ति अभियान के अंतर्गत करीब 1500 जल निकायों के सुधार और लगभग 1000 खराब हैंडपंपों को ठीक करने की योजना है।

इन सभी प्रयासों से यह साफ है कि अगर सरकारी योजनाएं और जनभागीदारी साथ मिलकर आगे बढ़ें, तो जल संरक्षण के जरिए भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है।

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