उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी हुई मतदाता सूची के ड्राफ्ट रोल ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कई बड़े जिलों में मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। खास बात यह है कि जहां महानगरों में बड़ी संख्या में वोट कटे हैं, वहीं मुस्लिम बहुल जिलों में यह गिरावट अपेक्षाकृत कम पाई गई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 15.44 करोड़ सूचीबद्ध मतदाताओं में से करीब 18.70 प्रतिशत यानी 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम बरकरार रखे गए हैं। यह आंकड़े अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची की तुलना में सामने आए हैं।
मतदाता सूची से नाम कटने के मामले में राजधानी लखनऊ और दिल्ली से सटे गाजियाबाद सबसे ऊपर हैं। लखनऊ में 30.04 प्रतिशत फॉर्म अनकलेक्टेड पाए गए। अक्टूबर 2025 में जहां लखनऊ में 39.94 लाख मतदाता थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 27.94 लाख रह गई है। यानी करीब 12 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए। इनमें 1.28 लाख मृत्यु, 4.28 लाख लापता या अनुपस्थित, और 5.36 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित (Migration) होने के मामले शामिल हैं।
इसी तरह गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत फॉर्म अनकलेक्टेड रहे। यहां मतदाताओं की संख्या 28.38 लाख से घटकर 20.20 लाख रह गई, यानी करीब 5.83 लाख वोटरों के नाम कटे हैं। इन दोनों जिलों में हुई यह बड़ी ‘सफाई’ पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा मानी जा रही है।
इसके मुकाबले मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाता सूची से नाम कटने की दर अपेक्षाकृत कम रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, रामपुर (18.29%), अलीगढ़ (18.60%), मऊ (17.52%), सहारनपुर (16.37%), मुजफ्फरनगर (16.29%), मुरादाबाद (15.76%), आजमगढ़ (15.25%) और पीलीभीत (13.61%) जैसे जिलों में वोट कटने का प्रतिशत लखनऊ और गाजियाबाद जैसे महानगरों से काफी कम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बड़े शहरी जिलों में मतदाता सूची में ज्यादा बदलाव हुए हैं।
हालांकि, कुछ अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक रही है। बलरामपुर इस सूची में तीसरे स्थान पर है, जहां 25.98 प्रतिशत फॉर्म अनकलेक्टेड रहे और मतदाता संख्या 15.83 लाख से घटकर 11.18 लाख रह गई। कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जहां वोटरों की संख्या 35.38 लाख से घटकर 26.36 लाख रह गई, यानी करीब 9.02 लाख वोट कम हुए। प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत की कमी आई, जिससे 11.56 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए। वहीं गौतमबुद्ध नगर (23.98%) और आगरा (23.25%) में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
इसके उलट, बुंदेलखंड क्षेत्र में मतदाता सूची में सबसे कम बदलाव देखने को मिला है। ललितपुर में सबसे कम केवल 9.95 प्रतिशत फॉर्म अनकलेक्टेड रहे। इसके बाद हमीरपुर (10.78%), महोबा (12.42%), बांदा (13%), चित्रकूट (13.67%) और झांसी (13.92%) का स्थान है। यह संकेत देता है कि इस क्षेत्र में मतदाता सूची अपेक्षाकृत स्थिर रही है।
CEO नवदीप रिणवा के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटने के पीछे प्रमुख कारण मृत्यु, स्थायी पलायन (Migration) और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण (Duplicate Registration) हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखने के लिए की गई है।
फिलहाल ये आंकड़े ड्राफ्ट रोल पर आधारित हैं। मतदाता 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद 6 मार्च को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। यदि किसी मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है और वह निर्धारित समय सीमा में अपना नाम फिर से जुड़वा सकता है।

