Posted By : Admin

एयर डिफेंस में भारत की ऐतिहासिक छलांग, DRDO का लेजर वेपन सिस्टम S-400 से दो कदम आगे

भारत वायु रक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए नेशनल एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करने का बड़ा ऐलान किया था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मिशन सुदर्शन चक्र नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य देश के हर कोने को एरियल थ्रेट यानी हवाई हमलों से सुरक्षित करना है। अब इस दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) बड़ी सफलता के बेहद करीब पहुंच गया है।

तेजी से बदलते वैश्विक सामरिक माहौल में वायु और मिसाइल सुरक्षा हर देश की प्राथमिकता बन चुकी है। अमेरिका भी खुद को सुरक्षित रखने के लिए गोल्डन डोम नाम से एक अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसकी शुरुआती लागत करीब 175 अरब डॉलर बताई जा रही है। वहीं यूरोप, जापान और चीन भी नई पीढ़ी की तकनीकों के साथ अपने एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर रहे हैं। भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं है और आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक पर लगातार काम कर रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के नीति-निर्माताओं और रक्षा प्रतिष्ठान को एक मजबूत, एकीकृत और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की आवश्यकता और अधिक महसूस हुई। इसी जरूरत से मिशन सुदर्शन चक्र की अवधारणा सामने आई। इसका लक्ष्य न केवल दुश्मन के हवाई हमलों से देश की रक्षा करना है, बल्कि हमले को समय रहते न्यूट्रलाइज कर प्रभावी जवाब देना भी है। इसी रणनीति के तहत आकाश-NG और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की फ्लीट को भी तैयार किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत भविष्य की स्पेस वॉर चुनौतियों को देखते हुए रूस से S-500 जैसे अल्ट्रा मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर भी विचार कर रहा है। इन सभी उपायों के बीच DRDO एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक पर काम कर रहा है, जो बिना बम या गोला दागे ही दुश्मन के हवाई हमलों को नाकाम कर सकती है।

दरअसल, DRDO एक हाई-एनर्जी लेजर बेस्ड वेपन सिस्टम विकसित कर रहा है, जो करीब 20 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तक एरियल थ्रेट को पल भर में खत्म कर सकता है। यह प्रणाली पारंपरिक मिसाइल आधारित सिस्टम से अलग होगी और इसे हार्ड-किल वेपन के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, यह 300 किलोवाट क्लास हाई-एनर्जी लेजर (HEL) सिस्टम हाइब्रिड इलेक्ट्रिकली ड्रिवन गैस लेजर आर्किटेक्चर पर आधारित होगा।

कार्यक्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस लेजर सिस्टम के लिए जरूरी अधिकांश कोर टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण हो चुका है। कई सब-सिस्टम पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं, जबकि कुछ इंटीग्रेशन के उन्नत चरण में हैं। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह बिजली से संचालित गैस लेजर का उपयोग करती है, जिससे उच्च दक्षता, बेहतर बीम क्वालिटी और भविष्य में अधिक शक्तिशाली सिस्टम विकसित करने की क्षमता मिलती है।

इस अत्याधुनिक हथियार प्रणाली के केंद्र में सेंट्रीफ्यूगल बबल सेकेंडरी ऑप्टिकल ग्रुप (SOG) तकनीक है, जिसे पहले ही मान्य किया जा चुका है। यह तकनीक हाई-पावर गैस लेजर में ऑप्टिकल बीम पाथ को सुरक्षित रखती है और थर्मल लोडिंग, टर्बुलेंस व प्रदूषण जैसी समस्याओं को रोकती है, जो लेजर की प्रभावशीलता को कम कर सकती हैं। इसके अलावा, हाई-गेन सुपरसोनिक नोजल का भी सफल परीक्षण किया जा चुका है, जो लेजर माध्यम के तेज़ विस्तार और शीतलन में मदद करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाई-एनर्जी लेजर वेपन सिस्टम भारत की अगली पीढ़ी की वायु एवं मिसाइल रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है। इसके सफल होने पर भारत न केवल पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम से आगे बढ़ेगा, बल्कि भविष्य के हाई-टेक युद्धों के लिए भी खुद को पूरी तरह तैयार कर सकेगा।

Share This