बजट से पहले सोना-चांदी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। गुरुवार को वैश्विक और घरेलू बाजारों में दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5594 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 5149 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 121.64 डॉलर से फिसलकर 108.8 डॉलर प्रति औंस रह गई। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा, जहां सिर्फ दो दिनों में चांदी की कीमतों में करीब 90 हजार रुपये प्रति किलो की गिरावट देखी गई।
एमसीएक्स (MCX) पर चांदी जहां पहले 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास थी, वहीं गिरकर 3,32,002 रुपये प्रति किलो तक आ गई। सोने में भी करीब 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह अपने ऑल-टाइम हाई से लगभग 16 हजार रुपये सस्ता हो गया। इस अचानक आई गिरावट के पीछे की वजह और आगे का रुख जानने के लिए बाजार के जानकार अनिल राय से बातचीत की गई।
अनिल राय के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बड़े निवेशकों द्वारा की गई प्रॉफिट बुकिंग है। उन्होंने बताया कि डॉलर में संभावित मजबूती के संकेत मिलने के बाद बड़े ट्रेडर्स और निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। जैसे ही डॉलर मजबूत होता है, सोने-चांदी में दबाव बढ़ता है। इसी वजह से एक ही दिन में चांदी में करीब 15 फीसदी और सोने में 6 से 7.5 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली।
उन्होंने यह भी बताया कि चांदी में हालिया तेजी उसकी वास्तविक मांग से ज्यादा थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी की फंडामेंटल डिमांड करीब 90 से 100 डॉलर प्रति औंस मानी जाती है, जबकि यह बढ़कर 121 डॉलर तक पहुंच गई थी। अब करेक्शन के बाद यह अंतर भरता दिख रहा है और आने वाले समय में चांदी 95 से 100 डॉलर के दायरे में स्थिर हो सकती है।
निवेशकों के व्यवहार पर बात करते हुए अनिल राय ने कहा कि तेजी के बाद आई इस गिरावट से रिटेल निवेशकों में घबराहट देखी जा सकती है, खासकर उन लोगों में जिन्होंने सोना-चांदी ईटीएफ (ETF) के जरिए निवेश किया है। अगर बड़े पैमाने पर ईटीएफ रिडेम्प्शन हुआ, तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
निवेश के नजरिए से उन्होंने साफ कहा कि सोना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प है क्योंकि इसमें उतनी ज्यादा वोलैटिलिटी नहीं होती। वहीं, चांदी को उन्होंने “चंचल धातु” बताते हुए कहा कि इसमें जितनी तेजी से तेजी आती है, उतनी ही तेजी से गिरावट भी देखने को मिलती है। ऐसे में फिलहाल चांदी में नए निवेश से बचने और सोने में गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की सलाह दी गई है।
अगर किसी निवेशक के पास पहले से चांदी है, तो अनिल राय का कहना है कि यह उनके निवेश के उद्देश्य पर निर्भर करता है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए खरीदी गई चांदी में मुनाफा बुक करना सही रहेगा, जबकि लंबी अवधि के निवेशक इस गिरावट में थोड़ी-थोड़ी खरीद कर अपनी औसत लागत कम कर सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 5 साल के नजरिए से देखें तो कीमती धातुओं में आगे अच्छी संभावनाएं बनी हुई हैं।
नए निवेशकों को लेकर उन्होंने सलाह दी कि अभी जल्दबाजी न करें। गिरावट पूरी तरह थमने और कीमतों में स्थिरता आने के बाद ही चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। साथ ही उन्होंने पोर्टफोलियो में चांदी को 5 फीसदी और सोने को 15 फीसदी तक सीमित रखने की सलाह दी, ताकि जोखिम संतुलित रहे।
आगे और करेक्शन की संभावना पर अनिल राय ने कहा कि डॉलर में मजबूती और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के चलते सोना-चांदी में अभी थोड़ा और दबाव देखने को मिल सकता है। खासकर अगर अमेरिकी मौद्रिक नीति सख्त रुख अपनाती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं पर असर पड़ेगा।
बजट को लेकर उन्होंने स्पष्ट कहा कि बजट आने तक इंतजार करना बेहतर है। बजट से पहले बाजार में अनिश्चितता और वोलैटिलिटी बढ़ जाती है, जिसे देखते हुए बड़े ट्रेडर्स फिलहाल कैश पोजीशन में रहना पसंद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, बजट के बाद स्थिति साफ होने पर निवेश के बेहतर मौके मिल सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि हालिया गिरावट से वैश्विक स्तर पर निवेशकों को करीब 27 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

