वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही उत्तर प्रदेश में बड़े विवाद की वजह बन गई है। सीरीज के टाइटल और कथित कंटेंट को लेकर आपत्ति जताते हुए लखनऊ में इसके डायरेक्टर और टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर की गई बताई जा रही है। शिकायत हजरतगंज कोतवाली में इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की ओर से दर्ज कराई गई है।
पुलिस का कहना है कि वेब सीरीज का नाम और उसकी प्रस्तुति एक विशेष जाति, खासतौर पर ब्राह्मण समाज, को नकारात्मक और गलत तरीके से दर्शाती है। इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। इसी आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद के बीच धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वेब सीरीज पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि ‘घूसखोर’ जैसे शब्द का प्रयोग समाज की छवि को नुकसान पहुंचाता है और यह पूरी तरह आपत्तिजनक है।
इसी तरह प्रयागराज के संतों ने भी इस वेब सीरीज के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताते हुए फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के टाइटल समाज में गलत संदेश देते हैं और धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।
विवाद बढ़ता देख वेब सीरीज के डायरेक्टर नीरज पांडेय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि कुछ दर्शकों की भावनाएं आहत हुई हैं और इस बात को समझते हुए फिलहाल सीरीज से जुड़ा सारा प्रमोशनल मटेरियल हटा दिया गया है। हालांकि उन्होंने कंटेंट को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाएगा, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
बताया जा रहा है कि वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ में मनोज बाजपेयी, नुसरत भरूचा और श्रद्धा दास अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इसका टीजर हाल ही में रिलीज किया गया था और यह सीरीज इसी साल नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है। फिलहाल एफआईआर और बढ़ते विरोध के चलते इसकी रिलीज पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

