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खामेनेई के बाद कौन? अलीरेजा अराफी को मिली अंतरिम नेतृत्व की बागडोर

ईरान में शीर्ष नेतृत्व को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश की लीडरशिप काउंसिल ने त्वरित निर्णय लेते हुए वरिष्ठ धर्मगुरु और नेता अलीरेजा अराफी को अस्थायी रूप से सर्वोच्च जिम्मेदारी सौंप दी है। यह फैसला उस समय आया है जब अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद क्षेत्रीय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, अलीरेजा अराफी को रविवार को लीडरशिप काउंसिल का ‘ज्यूरिस्ट मेंबर’ नियुक्त किया गया। ईरान की संवैधानिक व्यवस्था में इस पद का विशेष महत्व है। ज्यूरिस्ट मेंबर के रूप में उनकी नियुक्ति का अर्थ है कि वे तब तक सुप्रीम लीडर की भूमिका निभाएंगे, जब तक कि संबंधित असेंबली नए स्थायी नेता का चुनाव नहीं कर लेती।

ईरान की राजनीतिक और धार्मिक संरचना में सुप्रीम लीडर का पद सर्वोच्च माना जाता है, जो देश की रक्षा, विदेश नीति और प्रमुख रणनीतिक निर्णयों पर अंतिम अधिकार रखता है। ऐसे में खामेनेई के निधन के बाद नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में नेतृत्व परिवर्तन ईरान की आंतरिक स्थिरता और बाहरी कूटनीतिक समीकरणों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल, अलीरेजा अराफी अस्थायी रूप से देश की सर्वोच्च जिम्मेदारी संभालेंगे और नई नियुक्ति तक शासन की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे।

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