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पंजाब में स्वास्थ्य का बड़ा कवच, सेहत योजना के लिए ₹2000 करोड़ का बजट

पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सेहत योजना के लिए बजट 2026-27 में ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार को बीमारी के समय इलाज से पहले पैसों की चिंता न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को यह भरोसा होना चाहिए कि जरूरत के समय उसे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिलेंगी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि यह योजना राज्य की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा पहलों में से एक बन चुकी है, जिसके तहत अब तक करीब 65 लाख परिवारों को कवर किया गया है। इससे लगभग 3 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है और गंभीर बीमारियों के दौरान होने वाले भारी खर्च से राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए हजारों परिवार अब बिना आर्थिक तनाव के इलाज करा पा रहे हैं।

इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 9 लाख से अधिक सेहत कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से लोग 820 से ज्यादा अस्पतालों में उपचार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, योजना में 2,300 से अधिक उपचार पैकेज शामिल किए गए हैं, जिनमें हृदय रोग, कैंसर, किडनी से जुड़ी बीमारियां, ऑर्थोपेडिक समस्याएं और दुर्घटना से जुड़ी चोटों का इलाज शामिल है।

सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में 1,500 से अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है, जिनमें 600 से ज्यादा विशेषज्ञ और 900 से अधिक सामान्य चिकित्सक शामिल हैं। इससे अस्पतालों में बेहतर और समय पर इलाज सुनिश्चित हो पा रहा है।

पंजाब सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने नजदीकी सेवा केंद्र या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर सेहत कार्ड के लिए पंजीकरण कराएं। जागरूकता बढ़ाने के लिए युवा क्लब के सदस्य घर-घर जाकर लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी दे रहे हैं और उन्हें पंजीकरण में मदद कर रहे हैं।

सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाया जा रहा है, जिससे आम लोगों को समय पर और सस्ता इलाज मिल सके और कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित न रहे।

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