नई दिल्ली में आयोजित What India Thinks Today Summit 2026 के चौथे संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक हालात, भारत की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। लगातार तीसरी बार इस मंच पर पहुंचे प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत चुनौतियों से बचने वाला नहीं, बल्कि उनका डटकर सामना करने वाला देश बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और हर कठिन परिस्थिति में मजबूती से खड़ा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैश्विक अस्थिरता, खासकर मध्य पूर्व में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा समय में दुनिया गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे दौर में “भारत और विश्व” जैसे विषय पर चर्चा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा शांति और संवाद का रास्ता अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद दुनिया में संकट लगातार बढ़े हैं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों की एकजुटता ने देश को हर चुनौती से उबरने की ताकत दी है। उन्होंने बताया कि भारत की नीति, रणनीति और सामर्थ्य को देखकर दुनिया के कई देश हैरान हैं। आज भारत ग्लोबल साउथ से लेकर ग्लोबल वेस्ट तक और खाड़ी देशों से लेकर पड़ोसी देशों तक एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया अलग-अलग खेमों में बंटी हुई है, तब भारत ने देशों के बीच सेतु बनाने का काम किया है। “हम किसके साथ हैं?” जैसे सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत हमेशा अपने हितों और शांति के पक्ष में खड़ा रहेगा।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पूर्व सरकारों पर भी निशाना साधा और कहा कि पहले की नीतियों में देशहित से ज्यादा सत्ता को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने तेल संकट के दौरान जारी किए गए ऑयल बॉन्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस फैसले का बोझ आने वाली पीढ़ियों पर डाला गया।
समिट में प्रधानमंत्री के इस संबोधन को भारत की वैश्विक भूमिका, आर्थिक मजबूती और रणनीतिक सोच के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां उन्होंने यह संदेश दिया कि नया भारत हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

