देश में बढ़ते साइबर अपराध और फेक प्रोफाइल्स की समस्या को देखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। एक संसदीय समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स के लिए KYC (Know Your Customer) वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए। इस प्रस्ताव के लागू होने पर Facebook, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को आधार कार्ड या वोटर आईडी जैसे सरकारी पहचान पत्र देने पड़ सकते हैं।
समिति का मानना है कि इस कदम से इंटरनेट को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। KYC वेरिफिकेशन लागू होने पर फर्जी अकाउंट्स की पहचान करना आसान होगा और ऑनलाइन ठगी, साइबर स्टॉकिंग, ट्रोलिंग तथा ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। अभी तक अधिकतर साइबर अपराध बेनामी अकाउंट्स के जरिए किए जाते हैं, जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है। ऐसे में हर यूजर की पहचान सत्यापित होने से जवाबदेही बढ़ेगी और डिजिटल अपराधों पर लगाम लगेगी।
इस प्रस्ताव में बच्चों की सुरक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सख्त एज-वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया जाए, ताकि नाबालिगों को आपत्तिजनक और हानिकारक कंटेंट से बचाया जा सके। साथ ही, जिन अकाउंट्स पर बार-बार शिकायतें आती हैं, उनके लिए दोबारा वेरिफिकेशन और निगरानी की व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।
हालांकि, इस प्रस्ताव के साथ कई गंभीर प्राइवेसी चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सोशल मीडिया कंपनियों के पास यूजर्स के सरकारी दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी होगी, तो डेटा लीक और उसके दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, यह भी आशंका जताई जा रही है कि अनिवार्य KYC नियम उन लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं, जिनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक उनकी पहुंच सीमित हो सकती है।
फिलहाल यह प्रस्ताव केवल एक सुझाव के रूप में सामने आया है और अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां सुरक्षा और प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

