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पंजाब में शिक्षा क्रांति: भगवंत मान ने पेश किया 4 साल का रिपोर्ट कार्ड

पंजाब में शिक्षा क्षेत्र को लेकर पिछले चार वर्षों में हुए बदलावों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी सरकार का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया। “शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल” श्रृंखला के तहत प्रस्तुत इस रिपोर्ट में स्कूल और उच्च शिक्षा में किए गए ढांचागत सुधार, बढ़े हुए बजट और बेहतर शैक्षणिक परिणामों को प्रमुखता से रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले देश ही हर क्षेत्र में तेजी से तरक्की करते हैं, और पंजाब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सरकार के अनुसार, निरंतर सुधारों के चलते राज्य के सरकारी स्कूल अब मॉडल संस्थानों में बदल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी पंजाब के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2024 में पंजाब ने शीर्ष स्थान हासिल किया, जो राज्य के शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले चार वर्षों में पेपर लीक की एक भी घटना सामने नहीं आई, जो शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और मजबूती को दर्शाता है।

वित्तीय प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2021-22 में जहां शिक्षा बजट 12,657 करोड़ रुपये था, वहीं 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह करीब 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो इस क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है। इसके साथ ही 3,500 करोड़ रुपये के निवेश के साथ शिक्षा सुधार के दूसरे चरण की शुरुआत की जा रही है, जिसमें विश्व बैंक के साथ साझेदारी भी शामिल है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पहले शिक्षा व्यवस्था में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच बड़ी खाई थी, लेकिन अब सरकारी स्कूलों को निजी संस्थानों के बराबर सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से एक नई व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत अभिभावकों को बच्चों की अनुपस्थिति और शिक्षकों की छुट्टी की जानकारी सीधे मिलेगी, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी।

उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में 740 विद्यार्थियों ने जेईई और 1284 ने नीट परीक्षा पास की है। इसके अलावा 118 “स्कूल ऑफ एमिनेंस” स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 60 पहले ही चालू हो चुके हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को उनकी रुचि और योग्यता के अनुसार शिक्षा दी जा रही है, साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग भी उपलब्ध कराई जा रही है। पहली बार 24 लाख अभिभावकों ने मेगा पीटीएम में भाग लिया, जो शिक्षा प्रणाली में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

सरकार ने छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष कदम उठाए हैं। सरकारी स्कूलों और स्कूल ऑफ एमिनेंस में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू की गई है, जिससे लगभग 15,500 छात्राएं लाभान्वित हो रही हैं। इसके अलावा अप्रैल 2022 से अब तक 14,525 शिक्षकों की भर्ती की गई है और 12,316 कर्मचारियों की सेवाएं नियमित की गई हैं।

शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। विभिन्न बैचों को सिंगापुर, फिनलैंड और आईआईएम अहमदाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। अमृतसर की शिक्षिका गगनदीप कौर ने भी अमेरिका के कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जो इस पहल की व्यापकता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य की प्रगति की रीढ़ होती है और पंजाब सरकार ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि आज राज्य के सरकारी स्कूल न केवल बुनियादी सुविधाओं में बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता में भी निजी स्कूलों के बराबर खड़े हैं, और पंजाब का शिक्षा मॉडल पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है।

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